सहजयोग ध्यान से प्राप्त करें आद्यशक्ति श्री महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप का अनुभव
“योगजे, योगसंभूते, महालक्ष्मी नमोस्तुते!”
दीपावली का पावन पर्व माँ श्री महालक्ष्मी की आराधना, पूजन और वंदना का विशेष अवसर है। हम प्रतिवर्ष माँ लक्ष्मी से सुख, समृद्धि और शांति की प्रार्थना करते हैं, लेकिन क्या हमने कभी उनके उस दिव्य स्वरूप को जानने का प्रयास किया है, जो हमें आत्मिक उन्नति और आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाता है? सहजयोग ध्यान हमें इसी दिव्य महालक्ष्मी तत्व का अनुभव करने का मार्ग प्रदान करता है।
परमपूज्य श्री माताजी निर्मला देवी के अनुसार, आद्यशक्ति के तीन प्रमुख स्वरूप हैं—श्री महाकाली, श्री महासरस्वती और श्री महालक्ष्मी। ये तीनों शक्तियाँ सृष्टि में क्रमशः इच्छा, क्रिया और उत्क्रांति के कार्य को संचालित करती हैं। सहजयोग में श्री महालक्ष्मी का विशेष संबंध हमारी सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली के सुषुम्ना नाड़ी से है। यह शक्ति साधक की आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाती है और उसे आत्मसाक्षात्कार की अवस्था तक पहुँचने में सहायता करती है।
श्री महालक्ष्मी तत्व को समझने के लिए हमें श्री लक्ष्मी के स्वरूप को भी जानना होगा। माँ लक्ष्मी कमल पर विराजमान हैं। उनके हाथों में सुशोभित गुलाबी कमल पवित्रता, कोमलता और संतुलन के प्रतीक हैं। परमपूज्य श्री माताजी ने बताया है कि जो व्यक्ति वास्तव में लक्ष्मीपति है, उसका स्वभाव कमल के समान कोमल, मधुर और उदार होना चाहिए। जिस प्रकार कमल सभी को आश्रय देता है, उसी प्रकार एक सच्चा साधक प्रत्येक व्यक्ति का आदर करता है, दूसरों को प्रेम देता है और अपने जीवन में विनम्रता बनाए रखता है।
जब हमारे भीतर महालक्ष्मी तत्व जागृत होता है, तब आध्यात्मिक उत्क्रांति का मार्ग खुलता है। मनुष्य धीरे-धीरे अपनी भौतिक आसक्तियों और प्रकृति के बंधनों से ऊपर उठकर साक्षीभाव की अवस्था प्राप्त करता है। उसके भीतर संतोष, धैर्य, निर्भयता और स्थितप्रज्ञता विकसित होती है। वह असत्य का त्याग करके सत्य के प्रकाश में जीवन जीने लगता है।
सहजयोग में तपस्या का अर्थ स्वयं को कष्ट देना नहीं, बल्कि अपने चित्त को आत्मा की ओर केंद्रित करना है। जब हमारा चित्त आत्मा में स्थित होता है, तब हम निर्लिप्त होकर जीवन की परिस्थितियों को देख पाते हैं। हमारे भीतर आत्मचिंतन और आध्यात्मिक ज्ञान की जिज्ञासा जागृत होती है। हम समझने लगते हैं कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपनी आत्मिक पहचान को जानना है। महालक्ष्मी तत्व हमें देने की भावना सिखाता है। मानव जीवन का सबसे श्रेष्ठ दान है आत्मसाक्षात्कार का दान, जो परमपूज्य श्री माताजी की असीम कृपा से सहजयोग ध्यान के माध्यम से प्राप्त हो सकता है।
इस दीपावली, आइए केवल माँ महालक्ष्मी का पूजन ही न करें, बल्कि उनके दिव्य गुणों को अपने जीवन में भी आत्मसात करें। सहजयोग ध्यान सीखें और अपने भीतर स्थित महालक्ष्मी तत्व का अनुभव करें।
कुंडलिनी जागरण एवं आत्मसाक्षात्कार की सहज अनुभूति प्राप्त करने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-270-0800 अथवा वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर जानकारी प्राप्त करें। सहजयोग पूर्णतया निःशुल्क है।

