11.50 करोड़ प्रीमियम के बदले सिर्फ 2.93 करोड़ का क्लेम, फूटा किसानों का गुस्सा

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बीमा कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप, मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन; 44 में से 34 हल्कों के किसान क्लेम से वंचित
गुलाना। खरीफ वर्ष 2025-26 के फसल बीमा क्लेम में कथित अनियमितताओं को लेकर शुक्रवार दोपहर गुलाना तहसील मुख्यालय पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में किसान तहसील कार्यालय पहुंचे और बीमा कंपनी व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर और तहसीलदार के नाम ज्ञापन तहसीलदार रितेश जोशी को सौंपते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर सभी पात्र किसानों को बीमा क्लेम दिलाने की मांग की।
किसानों का आरोप है कि वर्ष 2025-26 में अतिवृष्टि और पीला मोजेक बीमारी से गुलाना तहसील के अधिकांश गांवों में सोयाबीन की फसल खराब हुई थी। शासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने क्रॉप कटिंग प्रयोग (सीसीई) कर नुकसान का सर्वे कराया, जिसमें कई गांवों में 25 से 33 प्रतिशत तक फसल नुकसान दर्ज किया गया। इसी आधार पर राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत राशि भी वितरित की, लेकिन बीमा कंपनी ने उसी नुकसान को आधार मानने के बजाय अधिकांश किसानों के बीमा दावे निरस्त कर दिए।
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि यदि शासन फसल नुकसान स्वीकार कर राहत दे सकता है तो बीमा कंपनी क्लेम देने से कैसे इनकार कर सकती है। इससे स्पष्ट है कि किसानों के साथ अन्याय हुआ है और बीमा कंपनी मनमानी कर रही है।
किसानों ने बताया कि गुलाना तहसील के 44 राजस्व हल्कों के 81 गांवों में 24 हजार 702 हेक्टेयर खरीफ फसल का बीमा कराया गया था। किसानों तथा केंद्र व राज्य सरकार के अंशदान से कुल 11 करोड़ 50 लाख 672 रुपए प्रीमियम के रूप में बीमा कंपनी को जमा कराया गया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने केवल 10 हल्कों के 3 हजार 652 किसानों को 2 करोड़ 93 लाख 28 हजार 440 रुपए का क्लेम दिया, जबकि 44 में से 34 हल्कों के हजारों किसानों को एक रुपया भी बीमा क्लेम नहीं मिला।
किसानों का कहना है कि बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू की गई थी, लेकिन बीमा कंपनी ने इसे केवल प्रीमियम वसूलने का माध्यम बना लिया है। फसल खराब होने पर किसान राहत की उम्मीद करता है, लेकिन क्लेम नहीं मिलने से आर्थिक संकट और गहरा गया है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्ष 2025 में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा गांव-गांव जाकर नुकसान का सर्वे किया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण भी किया था और किसानों को भरोसा दिलाया गया था कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने कृषि विभाग की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सभी प्रभावित किसानों को शीघ्र बीमा क्लेम नहीं मिला और बीमा कंपनी की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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