क्षमा : आत्मशक्ति और सहजयोग का सहज मार्ग

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सहजयोग में आत्मिक उन्नति के लिए अनेक गुणों का महत्व बताया गया है, लेकिन क्षमा भाव का स्थान अत्यंत विशेष है। श्री माताजी ने क्षमा को सहज धर्म की पहली आवश्यक चीज़ बताते हुए कहा है कि मनुष्य के भीतर जितनी अधिक क्षमा करने की शक्ति होगी, वह उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा।
हमारे जीवन में अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब किसी के शब्द, व्यवहार या कार्य से हमें दुःख पहुँचता है। हम उस घटना को बार-बार याद करते हैं और मन ही मन सोचते रहते हैं—किसने हमें क्या दुःख दिया, किसने हमारे साथ क्या गलत किया। इस प्रकार हमारा मन अतीत की घटनाओं में उलझा रहता है और भीतर अशांति बनी रहती है।
श्री माताजी हमें इसी स्थिति से बाहर निकलने का सहज मार्ग दिखाती हैं। वे कहती हैं कि बार-बार यह सोचने के बजाय कि किसने हमें क्या तकलीफ दी, हमें अपने भीतर यह भाव रखना चाहिए कि “हमें क्षमा करना है।”
क्षमा का अर्थ यह नहीं कि हम किसी गलत कार्य को सही मान लें। क्षमा का अर्थ है अपने मन को उस घटना के बंधन से मुक्त कर देना। जब हम किसी व्यक्ति को हृदय से क्षमा करते हैं, तब वास्तव में हम स्वयं को क्रोध, आक्रोश और मानसिक बोझ से मुक्त करते हैं।
श्री माताजी ने कहा है:
“कलियुग में क्षमा के सिवाय कोई भी बड़ा साधन नहीं है।” (प.पू. श्री माताजी, 20.11.1975)
क्षमा हमारे भीतर एक ऐसी शक्ति को जागृत करती है जो हमें सहज, शांत और संतुलित बनाती है। जब हम किसी के प्रति शिकायत और द्वेष को छोड़ देते हैं, तब हमारे भीतर प्रेम और करुणा के लिए स्थान बनता है।
श्री माताजी ने क्षमा के सहजयोग पर पड़ने वाले प्रभाव को भी अत्यंत सुंदर ढंग से समझाया है  “हर समय हम सोचते रहते हैं कि किसने क्या दुःख दिया, किसने क्या तकलीफ दी। उसकी जगह यह सोचना चाहिये कि हमें क्षमा करना है। उसको हमने क्षमा कर दिया और क्षमा करने से एकदम से आपको हैरानी होगी कि, आपकी कुण्डलिनी झट से ऊपर चढ़ जायेगी।”
— प.पू. श्री माताजी, 14.01.2004
अतः सहजयोगी के लिए क्षमा केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि आत्मिक विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है। जब हम क्षमा करते हैं, तो हमारा ध्यान दूसरों की गलतियों से हटकर अपनी आत्मिक यात्रा की ओर लौटता है। 
क्षमा करने वाला व्यक्ति कमजोर नहीं होता। वास्तव में, क्षमा ही उसकी आंतरिक शक्ति का प्रमाण है। जब मन शिकायतों के बोझ से मुक्त होता है, तब आत्मा की शांति अधिक स्पष्ट रूप से अनुभव होने लगती है।
क्षमा करें, स्वयं को मुक्त करें और सहजयोग की आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ें।
सहजयोग ध्यान पूर्णत: नि:शुल्क है। सहजयोग की अधिक जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा www.sahajayoga.org.in  से प्राप्त कर सकते हैं।

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