लंबे समय से जुआरियों के हौसले बुलंद, आखिर कौन कराएगा खकनार में जुआ क्लब बंद ?"
खकनार में जुए का 'तांडव': 'अंधेर नगरी' में बेख़ौफ़ जुआरी! क्या बुरहानपुर SP साहब खकनार थाने के पास का जुआ क्लब' बंद करवा पाएंगे ?
बुरहानपुर/खकनार। यह कैसी विडंबना है! एक तरफ़ पुलिस अधीक्षक महोदय बड़े-बड़े केस सुलझाने का दम भरते हैं, और दूसरी तरफ़ खकनार थाना क्षेत्र में अवैध जुए का कारोबार दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है। ऐसा लगता है, जैसे खकनार थाने को किसी ने 'अवैध जुआ क्लब' के संचालन का लाइसेंस दे दिया हो, क्योंकि खबरें छपने और लिखित शिकायतें होने के बावजूद इस सामाजिक कैंसर को रोकने में पुलिस पूरी तरह से निष्क्रिय साबित हुई है।
CM हेल्पलाइन बनी 'शिकायत दफ़न' पेटी!
अवैधता का आलम यह है कि जब कोई नागरिक CM हेल्पलाइन का सहारा लेता है, तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय, शिकायतकर्ता पर दबाव बनाकर शिकायत को बंद करवाने की 'सफ़लता' हासिल कर लेते हैं! क्या पुलिस का काम अपराध रोकना है या शिकायतें छुपाना? यह ज़िम्मेदारों की चुप्पी ही है जो जुआरी को अ
लोगों की मेहनत के लाखों रुपए दांव पर लगाकर बीबी-बच्चों को बेघर करने की छूट दे रही है।
किसकी छत्र-छाया में ये अवैध कारोबारी बिंदास घूमते हैं। जब एक जुआरी के ग्रामीण अपना घर का सामान और बच्चों की फीस तक दांव पर लगा देता है, और उसके परिवार की चीखें भी पुलिस को सुनाई नहीं देतीं, तो यह सवाल उठना लाज़मी है: क्या यह अवैध कारोबार किसी 'अदृश्य शक्ति' की अनुमति से चल रहा है?
थाना प्रभारी की कार्यशैली पर 'संदेह' का साया!
सवाल केवल जुआ कारोबार पर नहीं, बल्कि उस पुलिसिया 'मौन' पर है जो इस अवैध धंधे को फलने-फूलने की खुली छूट दे रहा है। मौखिक शिकायत तो छोड़िए, लोग लिखित में गिड़गिड़ा चुके हैं, फिर भी थाना प्रभारी की कार्यशैली से सवालों के घेरे स्पष्ट दिखाई दे रही है। जुआरी इतने निर्भीक हैं कि वे थाना परिसर में लगातार घूम रहे हैं या उसके ठीक आस-पास मंडराते हैं—मानों उन्हें पुलिस के संरक्षण का कवच प्राप्त हो! क्या यह कानून व्यवस्था का मज़ाक नहीं है?
थाना क्षेत्र में अवैध जुआ क्लब/अड्डों के संचालन को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना एक गंभीर विषय है।
खकनार थाना प्रभारी की कार्यशैली पर सवाल
स्थायी संचालन: लंबे समय से अवैध जुआ क्लब का बेरोकटोक चलना सीधे तौर पर खकनार थाना प्रभारी की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है।
अवैध जुआ क्यों संचलित: यह सवाल उठता है कि क्या खकनार थाना प्रभारी को इनअवैध जुआ अड्डों की जानकारी क्यों नहीं हैं? अगर जानकारी थी, तो उन पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
कानून व्यवस्था में चूक: अवैध गतिविधियों का पनपना यह दर्शाता है कि थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने में खकनार थाना प्रभारी असफल रहे हैं।
मिलीभगत की आशंका: लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में पुलिस और जुआ संचालकों के बीच मिलीभगत की आशंका पैदा होती है ?
दबाव में काम: जुआ अड्डों पर देरी से या कभी-कभार होने वाली कार्रवाई यह दर्शाती है कि पुलिस शायद किसी बाहरी दबाव के तहत काम कर रही है।
जनता का विश्वास: ऐसी स्थिति में, स्थानीय लोगों का पुलिस प्रशासन पर से विश्वास कमजोर होता है, जो पुलिसिंग के लिए सही नहीं है।

