बामौर कलां में ज्ञान की गंगा: सांगानेर से पधारे विद्वानद्वय का सकल दिगंबर जैन समाज ने किया भव्य स्वागत

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पं. कमलेश शास्त्री ने 50+ महिलाओं को पढ़ाया छहढाला, पं. सृजन शास्त्री ने महिलाओं को आलाप पद्धति व बच्चों को पाठमाला का कराया अध्ययन  
अतुल जैन 
बामौर कलां। धर्म और संस्कारों की पावन भूमि बने बामौर कलां में इन दिनों श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के माध्यम से धार्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण निर्मित हो रहा है। शिविर में राजस्थान के सांगानेर से पधारे विद्वान पंडित कमलेश शास्त्री एवं युवा विद्वान पंडित सृजन शास्त्री के सान्निध्य में समाजजन धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा दोनों विद्वानों का भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समाजजनों ने पुष्पमालाएं पहनाकर, श्रीफल एवं सम्मान पत्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का विशेष वातावरण देखने को मिला।

(महिलाओं ने लिया धर्म ज्ञान का अमृत लाभ)
विद्वान पंडित कमलेश शास्त्री द्वारा महिलाओं को धर्म शिक्षण सेवा के अंतर्गत “महान ग्रंथ” का अत्यंत सरल, प्रभावशाली एवं भावपूर्ण अध्ययन कराया गया। लगभग 50 से अधिक महिलाओं ने नियमित रूप से बैठकर धर्म लाभ प्राप्त किया। शास्त्री जी ने अपने प्रवचनों एवं अध्ययन शैली के माध्यम से धर्म के गूढ़ विषयों को सहज भाषा में समझाया, जिससे महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। शिविर में प्रतिदिन स्वाध्याय, जप, धर्म चर्चा एवं संस्कारमयी गतिविधियों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

(बच्चों को संस्कारों के साथ कराया जा रहा शास्त्र अध्ययन)
युवा विद्वान पंडित सृजन शास्त्री द्वारा बालक-बालिकाओं एवं युवाओं को “न्याय का ग्रंथ”, “आलाप पद्धति” सहित भाग-1 एवं भाग-2 का विशेष अध्ययन कराया जा रहा है। बच्चों ने अत्यंत उत्साह एवं अनुशासन के साथ अध्ययन में भाग लिया। शिविर के माध्यम से बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं बल्कि जीवन में अनुशासन, संस्कृति, नैतिकता एवं जैन परंपराओं का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समाजजनों ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में ऐसे संस्कार शिविर नई पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

(धर्म शिक्षण शिविर बना समाज में जागृति का केंद्र)
श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के माध्यम से पूरे क्षेत्र में धार्मिक जागृति एवं संस्कारों का वातावरण निर्मित हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवा एवं बच्चे शिविर में पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि विद्वान पंडितों के सान्निध्य में चल रहा यह शिविर समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी साबित हो रहा है। इससे बच्चों और युवाओं में धर्म के प्रति आस्था एवं अध्ययन की भावना मजबूत हो रही है।

(सम्मान समारोह में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब)
स्वागत एवं सम्मान समारोह के दौरान समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा वर्ग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य एवं दीर्घायु की मंगलकामनाएं की गईं। पूरे आयोजन में धर्म, ज्ञान और संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने बामौर कलां की धार्मिक पहचान को और अधिक गौरवान्वित किया।

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