अमर पद

  • Share on :

जरा से झुकता है तन सारा,
मृत्यु का बंधन जग पर भारी।
क्षणभंगुर है यह देह हमारी,
पर आत्मा रहती है अविनाशी।

धन-दौलत सब यहीं रह जाते,
साथ न जाता वैभव सारा।
सत्कर्मों की ज्योति जलाकर,
पार करो जीवन की धारा।

जो सत्य, प्रेम और धर्म अपनाए,
वही अमरता का पथ पाता है।
शरीर भले मिट्टी में मिल जाए,
नाम सदा जग में रह जाता है।
-


 गोपाल गावंडे -भावात्मक रचना।

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper