समन्वित खेती ही किसान की आजीविका का मुख्य आधार – कृषि विज्ञान मेले के द्वितीय दिवस प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों का बाजार रहा आकर्षण का केंद्र
कृषि मेले में तिलहन फसलों के उत्पादन, विपणन एवं प्रसंस्करण से लेकर प्राकृतिक एवं जैविक पर विशेषज्ञों और किसानों के मध्य गहन संवाद
कृषि विज्ञान मेला कृषि एवं उद्यानिकी फसलों की उन्नत लाभकारी खेती की ओर एक सशक्त कदम
झाबुआ कृषि विज्ञान मेला में खेती किसानी की विभिन्न विधाओं, आधुनिक कृषि यंत्रों से संयोजित प्रदर्शनियाँ रही आकर्षण का केंद्र -उन्नत तकनीक और आंचलिक संस्कृति के रंगों से सरोबार रहा कृषि विज्ञान मेला
रिपोर्टर :- सलीम हुसैन
झाबुआ। झाबुआ जिला खेती किसानी में खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन और विविधता के लिए सम्पूर्ण अंचल में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। जिले में लंबे रेशे वाला कपास, मक्का, सोयाबीन, उड़द, मूंगफली के साथ-साथ टमाटर, मिर्च एवं अमरूद जैसी उद्यानिकी फसलों का भी व्यापक उत्पादन होता है। कृषि को लाभ का उद्यम बनाने तथा किसानों को उद्यमिता की दिशा में प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय कृषि विज्ञान मेला सह सेमीनार के द्वितीय दिवस विविध गतिविधियों एवं तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।
मेले के दूसरे दिवस जिला पंचायत सदस्य सोनू चौहान बहादुर हटीला एवं भारतीय किसान संघ के जिला प्रमुख बच्चु सिंह मेडा की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। अतिथियों ने किसानों को शासन की कृषक कल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया। सोनू चौहान ने किसानों की आय वृद्धि हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, वहीं बहादुर हटीला ने भूमि स्वास्थ्य संवर्धन एवं नियमित मिट्टी परीक्षण के महत्व पर बल दिया।
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाए जाने के क्रम में डिजिटल कृषि पहल अंतर्गत उर्वरक वितरण की ई-विकास प्रणाली की जानकारी जिले के उप संचालक कृषि नगीन सिंह रावत द्वारा दी गई। उन्होंने ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से उर्वरक प्राप्ति की सरल प्रक्रिया समझाई। सहायक संचालक उद्यानिकी बी.एस. चौहान ने उच्च मूल्य की उद्यानिकी फसलों को अपनाने एवं खाद्य प्रसंस्करण योजनाओं से जुड़ने का आग्रह किया। सहायक संचालक सुरसिंह रावत ने भी किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
तकनीकी सत्रों में जिले के प्रगतिशील कृषक विमल भाबोर,वेस्ता भाई, कृषि सखी जमुना धन्नालाल कटारा सुगुना परमार, दलसिंह परमार (सजेली नरसिंहपुरा), कमलेश सोलंकी (कंजावानी) एवं राफेल आंतोंन भूरिया ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने आधुनिक एवं उन्नत खेती पद्धतियों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
इफको के जिला प्रतिनिधि संदीप राजपूत एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग के युवराज पाटीदार ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. दिवाकर, उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहायक बल्लू सिंह चौहान, कृषि विज्ञान केंद्र आलीराजपुर के विशेषज्ञ मुकेश बेनल एवं कृषि विज्ञान केंद्र झाबुआ के डॉ. विनय सिंह ने वैज्ञानिक खेती एवं तकनीकी नवाचारों पर विस्तार से जानकारी दी।
मेले में विभिन्न विभागों, स्वैच्छिक संगठनों, कृषि सखियों एवं एफपीओ द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग, उद्यानिकी विभाग, आयुष विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, कृषि अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य विभाग तथा आजीविका मिशन की दीदियों द्वारा योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। उप संचालक कृषि एन.एस. रावत एवं सहायक संचालक उद्यानिकी बी.एस. चौहान ने जैविक बाजार लगाने वाले किसानों एवं प्रदर्शनी में सहभागिता करने वाले विभागों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।
द्वितीय दिवस पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज, फल एवं सब्जियों का जैविक हाट विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। ई-विकास प्रणाली एवं प्राकृतिक खेती के सेल्फी पॉइंट को भी किसानों एवं अतिथियों द्वारा सराहा गया।
कार्यक्रम का संचालन मोहन डामोर एवं गोपाल मुलेवा ने किया तथा आभार प्रदर्शन सहायक संचालक कृषि संतोष सिंह मौर्य द्वारा किया गया। आयोजन की सफल संचालन में सहायक संचालक कृषि एच.एस. चौहान, संतोष सिंह मौर्य, एस.एस. रावत, एल.एस. चारेल एवं माल सिंह धारवे सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के समस्त अमले का सक्रिय सहयोग रहा।

