नीतीश के इस्तीफे के बाद नए समीकरण: बिहार में पहली बार भाजपा का सीएम, दिल्ली में दिग्गजों का मंथन
पटना। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से सीएम बनने जा रहे नेता के नाम पर आपसी सहमति बनाने के लिए भाजपा ने आज दिल्ली में राज्य के प्रमुख नेताओं की बैठक रखी है। बीजेपी मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन इस बैठक को लेंगे, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, राज्य के मंत्री मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, सांसद संजय जायसवाल जैसे बड़े नेता शामिल होंगे। बीजेपी की आज की बैठक का मकसद बिहार में भाजपा के पहले सीएम के नाम पर आपसी सहमति हासिल करना है। पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दौर में भाजपा में एक नाम पर सहमति बनाना मुश्किल काम नहीं है।
बिहार में 14 या 15 अप्रैल को भाजपा के सीएम के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार का गठन हो सकता है। सरकार में पहले की तरह भाजपा के साथ नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर), जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) से मंत्री शामिल होंगे।
नीतीश कुमार के मौजूदा कैबिनेट के कई मंत्री अगली सरकार में भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन कम से कम भाजपा और जदयू में कुछ नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। अगर दोबारा मंत्री बने तो सबसे ज्यादा फायदा में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा रहेंगे। उनको 6 महीने के अंदर एमएलसी या एमएलए बनने का मौका दोबारा मिल जाएगा। इस समय उनके मंत्री बनने का 5वां महीने पूरा होने को है और नियमतः उन्हें छह महीने के अंदर किसी सदन में पहुंचना है। तकनीकी पेच ना हो तो नई सरकार में फिर से शपथ लेने के बाद उन्हें छह महीने की यह मियाद एक बार फिर मिल जाएगी।
लिखा-पढ़ी में मुख्यमंत्री का चुनाव पार्टी के विधायक करते हैं, लेकिन भाजपा में विधायक दल की बैठक में नेता चुनने से पहले पार्टी का संसदीय बोर्ड इसका फैसला कर देता है। भाजपा के संसदीय बोर्ड में नितिन नवीन, नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यानारायण जाटिया और बीएल संतोष शामिल हैं। संसदीय बोर्ड से फैसले के बाद पार्टी विधायक दल के नेता का चुनाव कराने के लिए एक या दो पर्यवेक्षक भेजती है। पर्यवेक्षक पार्टी हाईकमान के फैसले की जानकारी विधायकों को देते हैं और फिर विधायक उस फैसले का अनुपालन करते हुए नेता चुनने की औपचारिकता पूरी करते हैं। विधायक दल का नेता मुख्यमंत्री बनता है।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

