ऐतिहासिक धरोहर पर अंतरराष्ट्रीय गिरोह की नज़र: भारत के 16वीं सदी के नरवर किले से 3.5 टन की दुर्लभ तोप चोरी

  • Share on :

शिवपुरी से ऋषि गोस्वामी की रिपोर्ट
​शिवपुरी। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नरवर किले में हुई एक दुस्साहसिक चोरी ने वैश्विक पुरातत्व और कला जगत में हड़कंप मचा दिया है। 16वीं शताब्दी की करीब 3,500 किलोग्राम वजनी एक अत्यंत दुर्लभ तोप को अज्ञात अपराधियों ने किले से गायब कर दिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कला तस्करों के एक बड़े सिंडिकेट का काम माना जा रहा है।
​सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई वारदात
​जांच में सामने आया है कि यह कोई अचानक हुई चोरी नहीं, बल्कि महीनों की योजना का हिस्सा थी। 15-16 जुलाई की रात हुई इस घटना से पहले, बदमाशों ने जुलाई की शुरुआत में ही तोप को उसके स्टैंड से गिराकर उसकी वजन क्षमता और उसे ले जाने के मार्ग का परीक्षण किया था। आधुनिक तकनीक और इंजीनियरिंग का उपयोग करते हुए, अपराधियों ने गद्दों और विशेष रूप से तैयार 'बैरिंग वाली ट्रॉली' की मदद से 3,500 किलो वजनी इस धातु के ढांचे को तीन हजार फीट की ऊँचाई से नीचे उतार लिया।
​सुरक्षा घेरे में गंभीर चूक
​इस घटना ने भारतीय पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किले की सुरक्षा के लिए तैनात छह सदस्यीय गार्ड टीम में से रात की पाली में मौजूद दोनों सुरक्षाकर्मी ड्यूटी स्थल से नदारद थे। बाद में पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास बुनियादी सुरक्षा उपकरण जैसे टॉर्च तक उपलब्ध नहीं थे और उन्होंने पहले दी गई 'सशस्त्र डकैती' की सूचना को केवल अपना बचाव करने के लिए गढ़ा था।
​अंतरराष्ट्रीय एंटीक बाजार में करोड़ों की कीमत
​पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, यह तोप पीतल, तांबे और कांसे जैसी मिश्रित धातुओं से बनी है, जिस पर फारसी और देवनागरी लिपि में प्राचीन शिलालेख अंकित हैं। अंतरराष्ट्रीय 'ब्लैक मार्केट' में ऐसी दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुओं की मांग बहुत अधिक होती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस तोप की अवैध बाजार में कीमत 2 से 5 करोड़ रुपये (लगभग 250,000 से 600,000 अमेरिकी डॉलर) तक हो सकती है।
​जांच का दायरा बढ़ा
​राज्य पुरातत्व विभाग और स्थानीय पुलिस अब मिलकर साक्ष्यों को खंगाल रहे हैं। घटनास्थल से मिले टायर के निशान और अन्य तकनीकी सबूत इशारा कर रहे हैं कि इसे किसी पेशेवर गिरोह द्वारा किसी बड़े वाहन में लादकर सीमावर्ती इलाकों या बड़े बंदरगाहों की ओर ले जाया गया है।
​अब नरवर किले की 'ओपन कचहरी' में सिंधिया राजवंश काल की बची हुई 13 तोपों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एंटीक तस्करी को रोकने वाली संस्थाओं को भी इस चोरी की सूचना दी जा सकती है ताकि तस्कर इसे वैश्विक बाजार में खपा न सकें।

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper