क्या गुंडों की 'जेब' में है कानून? वार्ड 19 के पार्षद पुत्र का गरीब परिवार पर खूनी तांडव, सरकारी जमीन पर अवैध वसूली का काला साम्राज्य!
सह सम्पादक -दीपक वाड़ेकर
इंदौर (बाणगंगा): मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने 'सुशासन' के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। थाना बाणगंगा के अंतर्गत दीपमाला काकड़ क्षेत्र में वार्ड क्रमांक 19 की पार्षद श्रीमती संध्या जायसवाल के पुत्र मासूम जायसवाल पर सत्ता के नशे में चूर होकर एक गरीब परिवार को बर्बाद करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
हफ्ता वसूली और दहशत का खेल
पीड़ित महिला सोनू शर्मा, जो मजदूरी कर अपने दो बेटों और वृद्ध मां का पेट पालती है, आज न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। आरोप है कि पार्षद पुत्र मासूम जायसवाल ने महिला को घर में रहने के बदले 3 लाख रुपये की फिरौती मांगी। धमकी दी गई कि पैसे नहीं दिए तो नगर निगम के बुलडोजर से घर जमींदोज कर दिया जाएगा। डर के साये में जी रही महिला ने इधर-उधर से जोड़कर 1 लाख रुपये मासूम को दे दिए, लेकिन लालच की भूख यहीं शांत नहीं हुई।
पुलिस और पार्षद पुत्र का 'गठबंधन'?
जब प्रताड़ना असहनीय हो गई, तो महिला बाणगंगा थाने पहुंची। लेकिन आरोप है कि खाकी ने फर्ज निभाने के बजाय पार्षद पुत्र की 'मुखबिरी' की। पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बजाय मासूम जायसवाल को खबर कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि शिकायत से बौखलाए पार्षद पुत्र ने अपनी माँ के पद का दुरुपयोग करते हुए महिला के बेटे हितेश (गोलू) पर ऑफिस में तोड़फोड़ का झूठा केस दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया।
रात के अंधेरे में गुंडागर्दी
अत्याचार की पराकाष्ठा यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि रात के अंधेरे में मासूम जायसवाल ने अपने गुंडों को भेजकर महिला के मकान की दीवार तुड़वा दी। अब राजनीतिक रसूख के दम पर आरोपी कोर्ट में आपत्ति लगाकर बेटे की जमानत तक नहीं होने दे रहा है।
शासकीय जमीन पर 'कब्जा माफिया' का राज
स्थानीय लोगों और पीड़ित के अनुसार, मासूम जायसवाल की नजर दीपमाला काकड़ की कीमती सरकारी जमीन पर है। वह राजनीतिक रसूख के दम पर शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा कर फर्जी तरीके से प्लाट बेच रहा है और अवैध निर्माण करवा रहा है। जो गरीब बीच में आता है, उसे पुलिस और पार्षद पद की धौंस दिखाकर कुचल दिया जाता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव से न्याय की गुहार
पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। महिला का सवाल सीधा है— "क्या आज के दौर में गरीबों के लिए कोई कानून नहीं है? क्या राजनेता अपनी जेब में कानून रखकर किसी का भी घर उजाड़ देंगे?"
अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'कब्जा माफिया' और 'वसूली भाई' बने पार्षद पुत्र पर क्या कार्रवाई करता है या फिर गरीब की चीखें सत्ता के शोर में दबा दी जाएंगी।

