अंदर का दीप जलाना ज़रूरी है… एक दीप मानवता के नाम — एक कविता, एक संदेश, एक संकल्प

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दीपावली विशेष | दैनिक रणजीत टाइम्स

दीप जलाओ, दीप जलाओ, पर पहले मन का अंधकार मिटाओ। घर की चौखट रोशन करना आसान है, किसी के जीवन में उजाला लाकर दिखाओ।

पटाखों की चमक पलभर की होती है, फिर वही रात, वही अंधेरा होता है। किसी के चेहरे पर मुस्कान जो ला दो, उसका उजाला उम्रभर सुनहरा होता है।

दीप बाहर ही नहीं, भीतर भी जलना चाहिए, रोशनी विचारों में, मन और मस्तिष्क में होनी चाहिए। सिर्फ घरों का जगमगाना दीपावली नहीं, इंसानियत भी इंसान के भीतर होनी चाहिए।

किस काम की वो लाखों की रोशनी, जब पड़ोसी के घर में अंधेरा हो? किस काम की वो महँगी मिठाई, जब कोई बच्चा भूखा सोया हो?

किस काम के वो नए-नए कपड़े, जब किसी की तन ढकने की आस अधूरी हो? त्योहार तो तभी सार्थक होगा, जब किसी की ज़िंदगी में खुशी पूरी हो।

होली रंगों से भेद मिटाती है, रंगपंचमी सबको एक रंग में रंग जाती है। तो फिर दीपावली पर क्यों दूरियाँ रहें? क्यों न ये भी दिलों को पास लाती है?

दीपावली दूरियाँ बढ़ाने का नहीं, दिलों की दूरियाँ मिटाने का त्योहार बने। अहंकार, ईर्ष्या और नफ़रत मिटें, हर इंसान दूसरे का मददगार बने।

एक दीप से दूसरा दीप जलता है, दूसरे से तीसरा, फिर संसार बदलता है। पहले दीप की रोशनी कम नहीं होती, बल्कि हर ओर उजाला बढ़ता है।

बस यही तो जीवन का संदेश है, दूसरों के काम आना ही विशेष है। अपने हिस्से की खुशी बाँटकर देखो, यही मानवता का सबसे सुंदर परिवेश है।

किसी बुज़ुर्ग का सहारा बन जाना, किसी रोते बच्चे को हँसाना। किसी मजबूर का हाथ थाम लेना, किसी टूटे हुए का हौसला बढ़ाना।

पटाखे जलाकर कुछ पल खुश हो सकते हो, पर किसी के काम आकर जीवनभर खुश रह सकते हो। धन से बड़ी दौलत इंसानियत की होती है, और सेवा से बड़ी कोई पूजा नहीं होती है।

इस दीपावली बस इतना प्रण कर लें, मन के भीतर भी एक दीप धर लें। जहाँ अंधेरा दिखे, वहाँ उजाला बन जाएँ, जहाँ दर्द दिखे, वहाँ मरहम बन जाएँ।

ना कोई अपना पराया रह जाए, ना कोई त्योहार पर अकेला रह जाए। हर घर में खुशियों का दीप जले, हर दिल में इंसानियत का फूल खिले।

क्योंकि असली दीपावली वो नहीं, जब हमारा घर रोशन हो जाए। असली दीपावली तो वो है, जब हमारे कारण किसी और का जीवन जगमगाए।

 इस बार एक दीप अपने घर के लिए, और एक दीप किसी के जीवन के लिए जलाएँ।

यही मेरी दीपावली है, यही मेरी प्रार्थना है, यही मेरा संकल्प है।

 

कवि गोपाल गावंडे प्रधान संपादक — दैनिक रणजीत टाइम्स
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
दीप जलें घर-घर में, मगर रोशनी दिलों तक पहुँचे।

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