संस्कृति की सुगंध, विज्ञान की उड़ान और वैदिक गणित की मेधा से सराबोर हुआ करैरा

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जिला संस्कृति महोत्सव का भव्य समापन — 250 भैया-बहिनों ने दिखाई प्रतिभा, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को मिला सम्मान
करैरा। भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराओं, कला की सृजनात्मकता, विज्ञान की जिज्ञासा और वैदिक गणित की अद्भुत तार्किक क्षमता का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब सरस्वती शिशु मंदिर करैरा में आयोजित जिला संस्कृति महोत्सव, विज्ञान मेला एवं वैदिक गणित समारोह 2026 का भव्य एवं गरिमामय समापन हुआ। समारोह में शिवपुरी जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों से आए 250 भैया-बहिन एवं 40 संरक्षक आचार्यों ने सहभागिता कर आयोजन को प्रतिभाओं के महाकुंभ का स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी करैरा श्री मुकेश शर्मा रहे, जबकि अध्यक्षता पंडित दीनदयाल उपाध्याय शिक्षा प्रसार समिति करैरा के अध्यक्ष श्री गोपाल साहू ने की। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को व्यक्तित्व निर्माण और संस्कार शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
16 विधाओं में गूंजी प्रतिभा की स्वर-लहरियां
संस्कृति महोत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत गीत, निबंध, रंगोली, चित्रकला, गीतापाठ, एकल भजन, तात्कालिक भाषण, बौद्धिक प्रश्नमंच, कथा कथन, आचार्य पत्र वाचन, तबला वादन, एकल अभिनय, मानस प्रथमाक्षरी, स्वरचित कविता, वंदेमातरम् एवं मूर्तिकला सहित विविध विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कहीं गीतों ने वातावरण को सुरमयी बनाया तो कहीं रंगोली और चित्रकला ने कल्पनाओं को रंगों का रूप दिया। तात्कालिक भाषण और प्रश्नमंच में विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता दिखाई दी, वहीं कथा कथन, स्वरचित कविता और एकल अभिनय में उनकी अभिव्यक्ति एवं रचनात्मकता ने उपस्थितजनों को प्रभावित किया।
विज्ञान मॉडल और प्रयोगों ने जगाई जिज्ञासा
विज्ञान मेले में विज्ञान प्रश्नमंच, विज्ञान मॉडल एवं विज्ञान प्रयोग प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक सोच और नवाचार का परिचय दिया। विभिन्न मॉडल एवं प्रयोगों के माध्यम से भैया-बहिनों ने यह संदेश दिया कि जिज्ञासा, प्रयोग और ज्ञान के समन्वय से नई संभावनाओं के द्वार खोले जा सकते हैं।
इसी क्रम में वैदिक गणित की प्रतियोगिताओं में वैदिक प्रश्नमंच, गणित मॉडल एवं वैदिक गणित प्रयोग आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अपनी मेधा का परिचय दिया।
करैरा के विद्वानों ने निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
प्रतियोगिताओं को निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में करैरा के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों ने चयनकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
व्यक्तिगत गीत में श्री दीपक दुबे एवं श्रीमती सुषमा दुबे, निबंध, स्वरचित कविता, कथा कथन एवं तात्कालिक भाषण में श्री प्रभुदयाल शर्मा, श्री प्रमोद भारती एवं श्री सौरव तिवारी, रंगोली में श्रीमती भावना नगरिया, श्रीमती सुनीता शुक्ला एवं श्रीमती ममता रावत ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
इसी प्रकार चित्रकला एवं एकल अभिनय में श्रीमती मनीषा गुप्ता एवं श्री रौनक, बौद्धिक प्रश्नमंच में श्री रवि भार्गव एवं श्री आनंद भार्गव, एकल भजन में श्रीमती अर्चना भार्गव, श्री मनोज श्रीवास्तव एवं श्री नरेंद्र श्रीवास्तव (सोनू सर), तबला वादन में श्री मनोज कोठारी तथा वंदेमातरम् में श्री नीलेश तिवारी एवं श्री सुनील भार्गव ने अपनी जिम्मेदारी निभाई।
विज्ञान मेला में श्री कालीचरण जाटव एवं श्री धर्मेंद्र रिछारिया तथा वैदिक गणित में श्री हरेंद्र लोधी एवं श्री राजकुमार लोधी ने चयनकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मेहनत को मिला सम्मान, विजेताओं के चेहरे पर खिला उत्साह
समापन समारोह का सबसे भावपूर्ण क्षण उस समय आया, जब विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले भैया-बहिनों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित शिवपुरी विभाग के विभाग समन्वयक श्री रामकुमार व्यास, संस्कृति महोत्सव संयोजक श्री राजेश सक्सेना, विज्ञान मेला एवं वैदिक गणित संयोजक श्री बृजेन्द्र यादव तथा विद्यालय के प्राचार्य श्री उमेश श्रीवास्तव ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
विद्यालय की संचालन समिति की ओर से सचिव श्री सतीश श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष डॉ. श्वेता शर्मा, श्री प्रहलाद राठौर एवं श्री धीरज रावत की विशेष उपस्थिति रही।
प्रतिभा के साथ संस्कारों की पाठशाला बना समारोह
यह आयोजन केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार, रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक चिंतन से जोड़ने वाला प्रेरणादायी मंच साबित हुआ। पांच दिनों तक चली गतिविधियों में विद्यार्थियों ने प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ एक-दूसरे से सीखने और अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्राप्त किया।
समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन, अनुशासन, संस्कार और सृजनशीलता के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। समारोह के समापन के साथ ही सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में प्रतिभा, संस्कार और ज्ञान की वह उजास छोड़ गया, जो विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नई राह दिखाती है।

शिवपुरी जिला ब्यूरो  
हेमंत भार्गव
 रणजीत टाइम्स न्यूज

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