हाट के जाम में ‘कैद’ हुई जिंदगी, एंबुलेंस में तड़पते रहे मरीज, खनियांधाना का शुक्रवार बना ‘काल’
सभागार मैदान सूना, मौत के मुहाने पर खड़ा मेंन रोड
नियमों को रौंदकर सड़क पर सजा बाजार, प्रशासन बना मूकदर्शक अगला नंबर किसका?
अतुल जैन
खनियांधाना। नगर परिषद खनियांधाना क्षेत्र में प्रत्येक शुक्रवार को लगने वाला साप्ताहिक हाट बाजार अब आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। शुक्रवार को एक बार फिर बस स्टैंड, मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर भीषण जाम की स्थिति निर्मित हो गई। हालात इतने खराब रहे कि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने जा रही एंबुलेंसें भी घंटों तक जाम में फंसी रहीं। इससे न केवल मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की आपातकालीन व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार सुबह से ही हाट बाजार में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए खनियांधाना पहुंचे थे। वहीं फल, सब्जी और अन्य सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने बस स्टैंड और मुख्य मार्ग के दोनों ओर सड़क पर ही दुकानें सजा लीं। सड़क के किनारे और बीच तक फैली दुकानों के कारण मार्ग संकरा हो गया, जिससे वाहनों का आवागमन बाधित होने लगा। देखते ही देखते मुख्य सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और पूरा क्षेत्र जाम की चपेट में आ गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा साप्ताहिक हाट बाजार के संचालन के लिए सभागार मैदान निर्धारित किया गया है। परिषद द्वारा समय-समय पर व्यापारियों को मैदान में ही दुकान लगाने के निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन अधिकांश दुकानदार ग्राहकों की अधिक आवाजाही और बेहतर बिक्री के लालच में मुख्य सड़क और बस स्टैंड क्षेत्र में ही दुकानें लगा लेते हैं। इसके कारण हर सप्ताह यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है और आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
शुक्रवार को लगे जाम के दौरान सबसे चिंताजनक स्थिति तब बनी जब मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंसें भी जाम में फंस गईं। सड़क के दोनों ओर दुकानों का कब्जा और बीच में खड़े वाहनों के कारण एंबुलेंस को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने स्वयं आगे आकर दुकानदारों और वाहन चालकों को हटाकर रास्ता बनाने का प्रयास किया, लेकिन अव्यवस्था इतनी अधिक थी कि एंबुलेंस को निकलने में काफी समय लग गया। लोगों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज की स्थिति नाजुक होती तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।
नगर के व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में नगर परिषद द्वारा सड़क पर लगने वाली दुकानों और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया गया था। उस समय कुछ दिनों तक यातायात व्यवस्था सुचारू रही, लेकिन प्रशासनिक सख्ती कम होते ही फिर से सड़क पर दुकानें लगने लगीं और पुरानी स्थिति वापस लौट आई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बस स्टैंड क्षेत्र पहले से ही नगर का सबसे व्यस्त इलाका है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर दुकानों का लगना और वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग जाम की सबसे बड़ी वजह बन रही है। नागरिकों ने मांग की है कि शुक्रवार के दिन हाट बाजार को पूरी तरह सभागार मैदान में स्थानांतरित कराया जाए तथा मुख्य मार्ग और बस स्टैंड क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाए।
लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि नगर परिषद और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना लगाए। साथ ही शुक्रवार को विशेष यातायात व्यवस्था लागू करते हुए बस स्टैंड एवं मुख्य बाजार क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की जाए, ताकि एंबुलेंस, स्कूल वाहन और अन्य आपातकालीन सेवाओं को बिना बाधा के रास्ता मिल सके।
नगरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। फिलहाल शुक्रवार को लगे भीषण जाम ने नगर की यातायात व्यवस्था और हाट बाजार प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है तथा लोगों को घंटों परेशानी झेलने पर मजबूर कर दिया।

