ध्यान : परमात्मा को अपने अस्तित्व में अनुभव करने की स्थिति है

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मानव जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर स्थित परम सत्य को जानने और आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए मिला है। हमारी यह देह, जो पंचमहाभूतों से बनी है और जिसके नौ द्वार हैं, वास्तव में एक कुरुक्षेत्र है—जहाँ हर क्षण सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों के बीच संघर्ष चलता रहता है। यही अंतर्द्वंद्व हमारे विचारों, भावनाओं और कर्मों में दिखाई देता है।
भगवद्गीता में वर्णित कुरुक्षेत्र के युद्ध को हम अपने आंतरिक जीवन का प्रतीक भी समझ सकते हैं। हमारे भीतर का क्षेत्रज्ञ, अर्थात आत्मतत्व, निरंतर हमारा मार्गदर्शन करता है। यही वह परम चेतना है, जो श्रीकृष्ण के रूप में अर्जुन का मार्गदर्शन करती है। हमारे भीतर का अर्जुन जिज्ञासा, शुद्ध इच्छा और सत्य को जानने की उत्कंठा का प्रतीक है। जब यह जिज्ञासा जागृत होती है, तब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को जानने की यात्रा प्रारंभ करता है।
सहजयोग ध्यान इसी आंतरिक यात्रा का सहज और प्राकृतिक मार्ग है। श्रीमाता निर्मला देवी ने आत्मसाक्षात्कार को प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार बताते हुए सहजयोग के माध्यम से कुंडलिनी जागरण और आत्मचेतना के अनुभव का मार्ग बताया। आत्मसाक्षात्कार के पश्चात ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर स्थित शांति, संतुलन और आनंद को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकता है। यह केवल किसी विचार या विश्वास को स्वीकार करना नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर उस सत्य का अनुभव करना है।
संत कबीरदास जी ने इसी आंतरिक सत्य की ओर संकेत करते हुए कहा है— “ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग। तेरा साईं तुझमें, बस जाग सके तो जाग॥”
परमात्मा को बाहर खोजने के बजाय अपने भीतर अनुभव करना ही आत्मज्ञान की दिशा में पहला कदम है। कबीरदास जी कहते हैं—
“जा कारण जग ढूँढ़िया, सो तो घट ही मांहि। परदा दिया भरम का, ताते सूझे नाहिं॥”
सहजयोग ध्यान के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के इस “भ्रम के पर्दे” को पहचानने और उससे ऊपर उठने का प्रयास करता है। ध्यान की अवस्था में विचारों की निरंतरता शांत होती है और व्यक्ति निर्विचारिता, आंतरिक शांति एवं आत्मचेतना का अनुभव कर सकता है।
अपने भीतर के कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र में परिवर्तित करना ही वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा है, जहाँ संघर्ष की जगह शांति, असंतुलन की जगह संतुलन और अशांति की जगह आनंद का अनुभव होने लगता है।
आत्मसाक्षात्कार और सहजयोग ध्यान का अनुभव करने के लिए अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800  अथवा www.sahajayoga.org.in  से प्राप्त कर सकते हैं।

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