लसूड़िया क्षेत्र से 14 वर्षीय नाबालिग बेटी का महीनों बाद भी नहीं लगा सुराग, पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट परिवार ने कलेक्टर व कमिश्नर से लगाई न्याय की गुहार
लसूड़िया थाने में दर्ज है गुमशुदगी का मामला (क्र. 514/2026), परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए विशेष टीम गठित करने की मांग की।
सह संपादक दीपक वाड़ेकर
इन्दौर। शहर के लसूड़िया थाना क्षेत्र के निरंजनपुर इलाके से एक 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का गंभीर मामला सामने आया है। घटना को कई महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस सुराग नहीं मिलने पर दुखी और डरे हुए पीड़ित परिवार ने अब जिला कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर के समक्ष पहुंचकर त्वरित कार्रवाई और न्याय की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निरंजनपुर खालसा चौक (देवास नाका, इन्दौर) निवासी सीमा पति गौरीशंकर मालवीय की 14 वर्षीय पुत्री कशिश मालवीय गत 6 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 5:00 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गई थी। परिवार और रिश्तेदारों द्वारा संभावित ठिकानों पर काफी तलाश करने के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला, तब लसूड़िया थाने में तत्काल गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी (गुमशुदगी क्रमांक: 514/2026, दिनांक 06.04.2026)।
मुख्य बिंदु:
लापता बालिका: कशिश मालवीय (उम्र लगभग 14 वर्ष)
घटना दिनांक: 06 अप्रैल 2026
थाना क्षेत्र: लसूड़िया थाना, इन्दौर (गुमशुदगी क्र. 514/2026)
परिवार की शंका: जालम सिंह केवट व अन्य परिजनों पर बहला-फुसलाकर ले जाने और छिपाने का गंभीर संदेह।
परिजनों ने लगाया पुलिस पर लापरवाही का आरोप:
पीड़ित माता-पिता का आरोप है कि घटना के इतने महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस ने न तो लड़की की बरामदगी के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई की है और न ही इस मामले में किसी आरोपी के विरुद्ध सख्त कदम उठाया है। इस वजह से पूरा परिवार अत्यधिक मानसिक तनाव, भय और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है। परिवार ने आशंका जताई है कि उनकी नाबालिग पुत्री को किसी व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर या गलत उद्देश्य से अपने साथ ले जाया गया है।
न्याय की गुहार:
असाहाय परिवार की माता सीमा मालवीय ने कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को दिए ज्ञापन में मांग की है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया जाए। साथ ही, उपलब्ध तकनीकी साधनों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल्स और साइबर सेल की मदद से नाबालिग की शीघ्र व सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराध की पुनरावृत्ति न हो सके।

