नेपाल में कुदरत का कहर: ग्लेशियर फटने से भीषण बाढ़, 587 की मौत और 2500 लापता; 400 से अधिक भारतीय फंसे
काठमांडू. नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का आंकड़ा 600 के करीब पहुंचा दिया है. अब तक 587 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं. इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. राहत की बात है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं. पहाड़ी इलाकों में राहत-बचाव का काम अभी जारी है. इसी बीच भोटेकोशी नदी के पास फिर पानी बढ़ने लगा है, जिससे एक और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है. हालांकि, शनिवार सुबह 6:30 बजे तक भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में पानी का बहाव सामान्य बताया गया है.
इस तबाही की शुरुआत पहाड़ों के ऊंचाई वाले इलाके से हुई. शुरुआती जांच के मुताबिक, एक ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबे का भारी हिस्सा नीचे आ गिरा. यह मलबा लेंडे नदी में गिरा, जिससे पानी का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया. इसके बाद जब यह कुदरती रुकावट टूटी, तो पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया. इसकी चपेट में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाके आ गए, जिससे कई बस्तियां, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह हो गईं
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढना है. पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें और पुल बह जाने से बचाव दलों को मौके तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है. नेपाल रेड क्रॉस के मुताबिक, इस आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. बाढ़ का असर जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा है. 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 933 कर्मचारी लापता बताए गए, जिनमें से 254 लोगों को बचा लिया गया. कई अन्य सुरंगों में फंसे होने की आशंका है. अकेले अपर त्रिशूली-1 परियोजना से 576 कर्मचारियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.
साभार आज तक

