एक गणपति — एक पेड़ - गणेश विसर्जन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की नई पहल
गणपति के नाम से लगे एक पौधा, आने वाली पीढ़ियों को मिले हरियाली का आशीर्वाद
इंदौर। गणेशोत्सव हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। भगवान श्री गणेश की स्थापना से लेकर विसर्जन तक श्रद्धालु पूरे भाव से उनकी आराधना करते हैं। अब इसी आस्था को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से रणजीत टाइम्स ने “एक गणपति — एक पेड़” अभियान का विचार समाज के सामने रखा है।
इस पहल का उद्देश्य सरल लेकिन दूरगामी है—जहाँ संभव और पर्यावरण की दृष्टि से उचित हो, पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की गणेश प्रतिमा का अलग विसर्जन कुंड में सम्मानपूर्वक विसर्जन किया जाए और गणपति बप्पा की स्मृति में कम से कम एक पौधा लगाया जाए।
यदि हजारों गणेश मंडल और लाखों परिवार इस संकल्प को अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में गणपति के नाम से बड़ी संख्या में वृक्ष तैयार हो सकते हैं। आज लगाया गया छोटा-सा पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए छाया, हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण की विरासत बन सकता है।
जलस्रोतों को बचाने की दिशा में पहल
अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्राकृतिक जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रदूषण के दबाव को कम करना भी है। जिन लोगों के पास खेत, फार्महाउस अथवा अन्य उपयुक्त निजी भूमि है, वे प्रतिमा के आकार के अनुरूप अलग विसर्जन कुंड तैयार कर सकते हैं।
उसमें स्वच्छ पानी भरकर प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण-अनुकूल रंगों से बनी गणेश प्रतिमा का श्रद्धापूर्वक विसर्जन किया जाए। प्रतिमा पूरी तरह मिट्टी में समाहित होने के बाद, जहाँ सुरक्षित और उपयुक्त हो, उस मिट्टी और जल का उपयोग पौधरोपण में किया जा सकता है।
इसके बाद उसी स्थान पर गणपति बप्पा के नाम से पौधा लगाया जाए और उसकी देखभाल का संकल्प लिया जाए।
हर वर्ष बढ़ता जाए ‘श्री गणेश स्मृति वन’
इस पहल की सबसे सुंदर कल्पना “श्री गणेश स्मृति वन” की है।
यदि कोई परिवार, संस्था, कॉलोनी, गणेश मंडल या फार्महाउस हर वर्ष गणेश विसर्जन के साथ एक पौधा लगाए और उसकी नियमित देखभाल करे, तो कुछ वर्षों में वही स्थान गणपति बप्पा के नाम का हरा-भरा स्मृति वन बन सकता है।
एक वर्ष — एक गणपति — एक पौधा।
दस वर्ष — दस वृक्ष।
हजारों परिवार जुड़ें तो हजारों वृक्ष।
लाखों श्रद्धालु जुड़ें तो हरियाली का विशाल जन-अभियान।
गणेश विसर्जन हो नशामुक्त
इस अभियान के साथ एक और महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश है—गणेश विसर्जन पूरी तरह नशामुक्त और मर्यादित होना चाहिए।
भगवान श्री गणेश की विदाई श्रद्धा का अवसर है। नशे की हालत में हुड़दंग, खतरनाक ड्राइविंग या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसी गतिविधियों के विरुद्ध प्रशासन को लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। गणेश मंडलों को भी स्वयं आगे आकर “नशामुक्त विसर्जन” का संकल्प लेना चाहिए।
सनातन की रक्षा के साथ प्रकृति की रक्षा
सनातन संस्कृति में प्रकृति को सदैव सम्मान दिया गया है। जल, वृक्ष, भूमि और जीव-जगत के प्रति संवेदनशीलता हमारी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसलिए “एक गणपति — एक पेड़” केवल पौधरोपण का अभियान नहीं, बल्कि आस्था को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है।
प्रतिमा मिट्टी में समाहित हो और उसी श्रद्धा की स्मृति में लगाया गया पौधा धीरे-धीरे विशाल वृक्ष बने—इससे सुंदर विदाई क्या हो सकती है?
आज जिस गणपति बप्पा की हमने पूजा की, आने वाले वर्षों में उनके नाम का वृक्ष हमारे बच्चों को छाया दे, पक्षियों को आश्रय दे और पर्यावरण को हरियाली दे।
रणजीत टाइम्स का आह्वान
इस गणेशोत्सव से संकल्प लें—
“एक गणपति — एक पेड़”
बप्पा का विसर्जन सम्मान से,
जलस्रोतों की रक्षा जिम्मेदारी से,
विसर्जन नशामुक्त और मर्यादित हो,
और गणपति के नाम से एक पौधा जरूर लगे।
आज एक पौधा लगाएंगे, कल गणपति के नाम का जंगल बनाएंगे।
गणपति बप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया!
एक गणपति — एक पेड़!
विशेष पहल: रणजीत टाइम्स

गोपाल गावंडे — प्रधान संपादक

