पद्मभूषण पं. गोकुलोत्सव जी महाराज को ‘कलागुरु’ सम्मान से किया सम्मानित

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इंदौर। कला एवं साहित्य के क्षेत्र में अपने अतुलनीय योगदान के लिए पद्मभूषण पं. गोकुलोत्सव जी महाराज को संस्कार भारती–इंदौर महानगर द्वारा ‘कलागुरु’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
ज्ञात हो  भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी अनंतकाल से चली आई गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहा है। इस उच्चकोटि की रहस्यमयी ब्रह्मविद्या में विश्व पटल पर इंदौर का नाम रोशन करने वाले संगीत के सूर्य का नाम पदमश्री गोकुलोत्सव महाराज है। उन्होंने भारतीय संगीत की सतत साधना, चिंतन और सेवा से न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और संगीत को गौरवान्वित किया है।

उस्ताद आमीर खां से प्रभावित होकर उन्होंने उनकी शैली में हवेली संगीत को अपनाया। इसके साथ ही अपनी शैली सर्वांग्य गायिकी भी बनाई। ध्रुपद के गायन के दौरान उन्होंने पाया कि यह बीजाक्षर मंत्रों की तरह प्रभाव रखते हैं। यह अपना खास स्वरूप बनाते हैं और इसका जीवन में सार्थक प्रभाव भी पड़ता है। उनकी इस सार्थक यात्रा के लिए पदमभूषण, पदमश्री, राष्ट्रीय तानसेन अवार्ड, प्रेसिडेंट अवार्ड सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

गुरुकुल के माध्यम से 3200 शिष्यों को दी संगीत की शिक्षा़ - गोकुलोत्सव महाराज ने 1972 में गिरधर निकुंज मल्हारगंज में जीएमएस संगीत गुरुकुल की स्थापना की। इसके जरिए वे 3200 से अधिक शिष्यों को संगीत की शिक्षा दे चुके हैं। आज भी आनलाइन शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दे रहे हैं। संगीत की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली। शास्त्रीय संगीत के सूर्य के रूप में पहचाने जाने वाले गोकुलोत्सव महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं। वे वेदों के साथ यूनानी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्घति के भी जानकार हैं। उनका संस्कृत, फारसी, उर्दू, अरबी, ब्रज, अवधि, गुजराती भाषा पर भी समान अधिकार है। इन सबके साथ पुष्टिमार्गीय वल्लभाचार्य संप्रदाय के आचार्य भी हैं.
संस्कार भारती की ओर से जारी सम्मान-पत्र में कहा गया कि गोकुलोत्सव जी महाराज की कठोर साधना, अथक परिश्रम और अद्वितीय प्रतिभा ने कला जगत को समृद्ध किया है। उन्होंने अपनी कला को उत्कृष्टता के उच्चतम शिखर तक पहुँचाने के साथ ही अनेक कला-साधकों को प्रेरणा, दिशा और आत्मविश्वास प्रदान किया है।
सम्मान-पत्र में उनके ज्ञान, अनुभव एवं स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन को भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण बताया गया। संस्कार भारती–इंदौर महानगर ने उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर सृजनशीलता की कामना की।
संस्कार भारती–इंदौर महानगर द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के प्रति विशेष आदर और सम्मान का प्रतीक है!

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