मॉडर्न वॉरफेयर की तैयारी: घरेलू कंपनियों से 2 बिलियन डॉलर के ड्रोन खरीदेगी भारतीय सेना

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नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र सेना बदले जमाने के मुताबिक खुद को ढालने में जुटी हुई है। इसी के तहत भारत सरकार अपनी मिलिट्री के लिए अबतक की सबसे बड़ी स्वदेशी ड्रोन खरीदारी की प्रक्रिया में जुटी है। यह सारे ड्रोन भारतीय कंपनियों से खरीदे जाएंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही रक्षा मंत्रालय सेनाओं में ड्रोन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर बहुत ज्यादा फोकस कर रहा है और ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध से भी इसकी अहमियत का पता चल चुका है।
भारत सरकार इस साल घरेलू कंपनियों से करीब 2 बिलियन डॉलर (लगभग ₹20,000 करोड़) की ड्रोन खरीदारी के ऑर्डर देने की प्रक्रिया में जुटी है। भारतीय सशस्त्र सेनाओं को किसी भी समय ऑपरेशन के लिए तैयार रखने और मिलिट्री के आधुनिकीकरण के लिए देश का यह अबतक का सबसे विशाल ड्रोन सौदा होगा। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस खरीदारी के लिए फास्ट-ट्रैक खरीदारी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) सिस्टम की खरीदारी की यह प्रक्रिया 18 से लेकर 24 महीने के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।
हाल ही में करीब ₹3,000 करोड़ की टैक्टिकल-क्लास ड्रोन की खरीदारी के मुकाबले यह बहुत बड़ी डील होने जा रही है।
संभावना है कि भारतीय कंपनियां सशस्त्र सेनाओं को इसी साल ड्रोनों की डिलीवरी शुरू कर देंगी।
मॉडर्न वॉरफेयर में बहुआयामी भूमिका निभा रहे ड्रोन
ऑपरेशन सिंदूर हो या रूस-यूक्रेन युद्ध या फिर पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिकी और इजरायल के बीच चल रहा मौजूदा सैन्य संघर्ष, मॉडर्न वॉरफेयर में मानवरहित सिस्टम का इस्तेमाल बहुत बढ़ चुका है और इसने अपना रोल बखूबी साबित भी किया है।
सर्विलांस से लेकर सटीक हमलों और युद्ध क्षेत्र में इंटेलिजेंस जुटाने तक में ड्रोन बहुत बड़ी भूमिका निभाने लगा है।
यही नहीं, ड्रोन युद्ध भूमि में लॉजिस्टिक के लिए भी बड़े काम आ रहे हैं और इसने खर्च को भी घटाने का काम शुरू कर दिया है।
यह इस वजह से संभव हुआ है, क्योंकि टेक्नोलॉजी में दक्षता आने के साथ-साथ अत्याधुनिक से अत्याधुनिक ड्रोन सिस्टम की उपलब्धता को बहुत ही आसान कर दिया है।
युद्ध में सेनाएं आक्रमण की भूमिका निभा रही हों या सुरक्षात्मक रणनीति पर काम कर रही हो, दोनों ही स्थिति में ड्रोन बहुत ही सस्ता, सुगम और सटीक हथियार बन चुके हैं।
साथ ही साथ ड्रोन पर निर्भरता बढ़ने से युद्ध भूमि में इंसान के नुकसान की आशंका तेजी से कम होने लगी है।
आत्मनिर्भरता,स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंक पर फोकस से बदली स्थिति
भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भरता और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंक पर फोकस कर रही है।
भारत में अब 600 से ज्यादा कंपनियां हैं, जो ड्रोन और इससे जुड़े उपकरण बना रही हैं।
इनमें रक्षा कंपनियां और स्टार्टअप्स भी हैं।
सरकार ने ऐसे सुधार किए हैं, जिससे ड्रोन निर्माण क्षेत्र में इनोवेशन और प्रोडक्शन को मदद मिले और यह क्षेत्र ज्यादा से ज्यादा निवेश भी आकर्षित कर सके।
अच्छी बात ये है कि अपनी मिलिट्री के लिए ही इसकी डिमांड में नीति बदलने से बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है।
साभार नवभारत टाइम्स 

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