चिरायु टीम की ड्यूटी पर सवाल, स्कूलों में स्वास्थ्य परीक्षण के शेड्यूल के पालन पर उठे सवाल
छुरा। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत गठित टीमों की कार्यप्रणाली को लेकर छुरा विकासखंड में सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिरायु टीमों के लिए प्रत्येक माह ड्यूटी चार्ट तैयार किया जाता है, जिसमें टीम को किस तारीख को किन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना है, इसका पूरा कार्यक्रम निर्धारित रहता है। इसी आधार पर संबंधित शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को भी सूचना दी जाती है, ताकि निर्धारित दिन टीम के पहुंचने और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। लेकिन अब आरोप है कि निर्धारित तारीखों और स्थानों पर टीम के नहीं पहुंचने के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ स्कूलों में तो लंबे समय से स्वास्थ्य परीक्षण टीम के नहीं पहुंचने की बात भी सामने आई है।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार कई ऐसे स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए निर्धारित कार्यक्रम तो जारी किया गया, लेकिन तय तारीख पर टीम की मौजूदगी नहीं दिखाई दी। कुछ स्थानों पर अंतिम बार चिरायु टीम के पहुंचने को करीब दो वर्ष बीत जाने की बात सामने आ रही है। वहीं कुछ स्कूलों में निर्धारित तारीख के बजाय किसी अन्य दिन अचानक स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। यदि निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव किया जाता है तो संबंधित संस्था को इसकी जानकारी मिलना आवश्यक है, क्योंकि चिरायु कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिक स्वास्थ्य परीक्षण करना नहीं, बल्कि बच्चों में पाई जाने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर उन्हें उपचार अथवा आवश्यकतानुसार रेफरल सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम का पालन नहीं होने से योजना की वास्तविक पहुंच और बच्चों को मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मामले का दूसरा पहलू स्वास्थ्य संचालनालय के उस स्पष्ट निर्देश से जुड़ा है, जिसमें 3 जुलाई 2025 को जारी पत्र के माध्यम से सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि RBSK के तहत कार्यरत चिरायु दलों और DEIC में पदस्थ स्टाफ की ड्यूटी कार्यक्रम के अलावा अन्य कार्यों में न लगाई जाए और न ही उन्हें अन्यत्र अटैच किया जाए। संचालनालय ने यह भी कहा था कि चिरायु दल निर्धारित ATP के अनुसार नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करें। इसके बावजूद छुरा ब्लॉक में चिरायु टीम के कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी अन्य कार्यों में लगाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चिरायु ब्लॉक छुरा की टीम में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत डॉक्टर तरुण पटेल की 22 तारीख को स्कूल भ्रमण से संबंधित ड्यूटी और उसी दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा में उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि उक्त दिन उन्हें क्योंनपालमा प्राथमिक स्कूल में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जाना निर्धारित था, जबकि उसी दिन उनके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी करने की जानकारी सामने आई है। इसी मामले में डॉक्टर तरुण पटेल की स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के उपचार से जुड़ी भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। सूत्रों और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार डॉक्टर तरुण पटेल, जो चिरायु कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए नियुक्त हैं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा में एक अन्य डॉक्टर के नाम से बनी पर्ची पर स्वयं मरीज को दवा लिखते और हस्ताक्षर करते पाए गए। बताया गया है कि डॉक्टर तरुण पटेल ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति (BAMS) की पढ़ाई एवं डिग्री के आधार पर सेवा में रहते हुए चिरायु टीम में नियुक्ति प्राप्त की है। ऐसे में यदि किसी MBBS डॉक्टर के नाम से बनी पर्ची पर उनके द्वारा स्वयं एलोपैथिक दवाएं लिखने और हस्ताक्षर करने की बात सही पाई जाती है, तो यह जांच का विषय है कि ऐसा किस अधिकार, नियम और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया गया। साथ ही, जिस कर्मचारी की नियुक्ति विशेष रूप से चिरायु कार्यक्रम के तहत बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और उनसे संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए की गई है, उसकी निर्धारित स्कूल ड्यूटी के समय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थिति किस आदेश अथवा व्यवस्था के तहत रही, यह भी जांच में स्पष्ट होना जरूरी है।
इन तमाम बिंदुओं को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी राहुल नेतम का कहना है कि उनके सामने जो जानकारी रखी गई है, उसके आधार पर सभी विषयों की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सामने आए तथ्यों में कितनी सच्चाई है और संबंधित ड्यूटी, उपस्थिति तथा मरीज को दवा लिखने से जुड़े मामले में वास्तविक स्थिति क्या है।

