‘रामबाबू मेरा सुख-दुख का साथी था’—विधायक प्रीतम लोधी का बयान चर्चा में

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अहिल्याबाई जयंती समारोह में डकैत के जयकारे, गरमाई राजनीति
मंच से डकैत का महिमामंडन! पिछोर विधायक का बयान 
अतुल जैन 
पिछोर। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार विवाद की वजह उनके द्वारा कुख्यात मृतक दस्यु सरगना रामबाबू गडरिया की सार्वजनिक मंच से प्रशंसा करना और उसे अपना "सुख-दुख का साथी" तथा "भाई" बताना है।
रविवार को पिछोर नगर में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक प्रीतम लोधी ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि उनके और रामबाबू गडरिया के बीच गहरे संबंध रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे और उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों में उसका साथ दिया।

("डाकू भी इंसान होते हैं"—विधायक का बयान)
अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि एक समय उनकी बहन के साथ अत्याचार हुआ था, जिसके विरोध में उन्होंने हजारों लोगों के साथ आंदोलन किया था। उस दौरान उन पर एक डाकू का सहयोगी होने के आरोप लगे थे। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि "क्या डाकू इंसान नहीं होते हैं।"
विधायक ने यह भी कहा कि उन्हें रामबाबू गडरिया की जेल से लेकर जंगल तक की यादें आज भी याद हैं और वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला।

(कुख्यात दस्यु पर थे 111 से अधिक मामले)
गौरतलब है कि रामबाबू गडरिया चंबल अंचल का कुख्यात दस्यु सरगना रहा है। उस पर और उसके गिरोह पर हत्या, लूट, अपहरण समेत गंभीर अपराधों के लगभग 111 मामले दर्ज थे। पुलिस ने उस पर 15 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। उसकी पहचान क्षेत्र के सबसे चर्चित दस्युओं में होती रही है।

(जिंदाबाद के नारे और हथियारों के प्रदर्शन से बढ़ी चर्चा)
कार्यक्रम के दौरान विधायक द्वारा रामबाबू गडरिया के समर्थन में नारे लगाए जाने का वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं कार्यक्रम के दौरान निकाली गई रैली में कुछ लोग हाथों में तलवार और फरसे लहराते हुए भी दिखाई दिए, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

(राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज)
विधायक के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। एक ओर समर्थक इसे सामाजिक संबंधों और व्यक्तिगत भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं आलोचक एक कुख्यात अपराधी के सार्वजनिक महिमामंडन पर सवाल उठा रहे हैं।

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