आरएसएस शताब्दी वर्ष: मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा- 'संस्कृति, स्वदेशी और एकता से ही मजबूत होगा देश'

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एकता, AI से लेकर फ्रांस प्रोटेस्ट तक, सभी मुद्दों पर बात की। उन्होंने नशे की समस्या, सही-गलत के बीच अंतर समझने और नई पीढ़ी को संस्कार सिखाने पर भी जोर दिया।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कार्यक्रम में बंगाल के राज नायारण बसु का जिक्र किया। उनके जन्म को 200 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा, समाज में स्वदेशी मेलों के जरिए लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करने के लिए राज नायारण बसु ने हिंदू मेले की शुरुआत की थी।  
आरएसएस के विजयादशमी समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संत रविदास के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा, 'जब देश विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों का सामना कर रहा था और लोगों पर अत्याचार हो रहे थे तब चारों ओर डर का माहौल था। ऐसे समय में संत रविदास ने स्वधर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया।'
आरएसएस प्रमुख के मुताबिक, संत रविदास ने अपने जीवन से उदाहरण पेश कर समाज को सांत्वना दी और लोगों का मनोबल बढ़ाया। 
मोहन भागवत ने कार्यक्रम में कहा कि आरएसएस पिछले 100 वर्षों से भारत को उसकी अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के आधार पर संगठित और मजबूत बनाने का काम कर रहा है। भागवत ने स्वदेशी अपनाने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में जिन पांच प्रमुख बदलावों पर जोर दिया जा रहा है, उनमें अपनी पहचान का बोध और स्वदेशी चीजों को अपनाना शामिल है। 
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।'
कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की विविधता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत माता का सर्वोच्च स्थान है। देश में अलग-अलग पंथ, प्रांत, जातियां, भाषाएं, खानपान और रीति-रिवाज हैं। लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है। भागवत ने कहा कि देश पहले भी एक होकर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी इसी एकता के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में ड्रग्स की समस्या पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी नशीली दवाओं की आदी होती जा रही है। उन्होंने नशे को एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि अभिभावकों को आने वाली पीढ़ी को इसे लेकर सीख देने की बात की है। 
उन्होंने कहा, 'यह हमारी सनातन काल से चली आई परंपरा है। सृष्टि में विविधता है। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। विविधता जितनी स्वाभाविक और परिवर्तनशील है, उतनी ही संपूर्ण अस्तित्व की एकता का सत्य अचल, अटल और शाश्वत है।'
साभार अमर उजाला

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