प्रकृति की सहायता से सूक्ष्म व स्थूल शरीर  का संतुलन ही सहजयोग ध्यान है

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मनुष्य के शरीर की संरचना प्रकृति के पंच तत्वों से हुई है। प्रकृति की सहायता से मनुष्य अपने भीतर सन्तुलन स्थापित कर सकता है। हमारे अंदर के सात चक्र प्रकृति के भिन्न-भिन्न तत्वों से ही बने हैं और इन्हीं की सहायता से हम सूक्ष्म तंत्र को शुद्ध कर सकते हैं। उदाहरण के लिए हमारे द्वितीय चक्र स्वाधिष्ठान की संरचना में अग्नि तत्व सहाय है। इसी चक्र से शुरु होती है दायीं ओर की नाड़ी जिसे पिंगला नाड़ी कहा गया है। पिंगला नाड़ी पर श्री हनुमान जी एवं श्री महासरस्वती की शक्ति विराजित है। यह कर्म की नाड़ी है, हमारी सारी सोचने की शक्ति एवं कर्म इसी नाड़ी द्वारा कार्यान्वित होते हैं। यदि व्यक्ति अतिशयता में जाकर इस तरफ ज़्यादा झुक जाता है, दिन-रात सोच-विचार, प्लानिंग, काम - काज में ही लिप्त रहता है, वह अति शुष्क हो जाता है, क्रोधी हो जाता है एवं परमात्मा से उतना ही दूर होता जाता है, वह अहंकार की चपेट में आ जाता है क्योंकि यही नाड़ी मस्तिष्क वाले भाग में जाकर अहंकार को दर्शाती है, मैं  (अहंकार) के झूठे संसार में स्वयं के सुन्दर व्यक्तित्व को खो देता - है, आत्मा के प्रकाश से दूर चला जाता है अर्थात सत्य और शाश्वत तथ्य से दूर चला जाता है। सत्य तो ये है की हम केवल शुद्ध आत्मा है और अहंकार, मद, मोह सब झूठ है। 
   इस नाड़ी पर सूर्य की भी उपस्थिति होती है, इस नाड़ी के प्रति संतुलन रखने से मनुष्य तेजस्वी हो कर निखर जाता है, जब वह मानव कर्म और इस संसार के भौतिक सुखों की दौड़ को खेल समझ लेता है तो वह संतुलित हो, साक्षीभाव में इसे एक लीला मात्र के रूप में देखता है तो वह दाईं ओर के सभी सुंदर गुणों से आशीर्वादित होता है और उसके कार्य परमात्मा की प्रेम शक्ति द्वारा स्वतः ही आयोजित होते है, उसे दिमाग दौड़ाने की आवश्यकता भी नहीं होती।
   परंतु यह केवल शब्दों का खेल नहीं बल्कि अनुभव है। श्री माताजी द्वारा संस्थापित सहजयोग की नींव ही अनुभव है l परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी सभी साधकों को संबोधित करते हुए बताती हैं कि हमें बिना अनुभव के कुछ भी मान लेना नहीं चाहिए और इसीलिए कुण्डलिनी जागरण की सहायता से हम, परमात्मा की प्रेम शक्ति को अपने हाथों पर एवं तालु भाग पर अनुभव करते हैं, आकाश तत्व की सहायता से हम अपने दायें भाग को संतुलित करते हैं। ध्यान में बैठने से पहले हम माँ प्रकृति की सहायता से अपने दाएं एवं बाएं तरफ को संतुलित करते है एवं मध्य में परमात्मा की शक्ति से जुड़ते है। सहजयोग ध्यान पूर्णत: नि:शुल्क है। यदि आप भी इसे अनुभव करना चाहते चाहते है तो जानकारी हमारे टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते हैं।

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