ध्यान द्वारा योग की पूर्णता सिखाता है सहज योग
विश्व योग दिवस विशेष
योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर है। आज विश्वभर में योग को स्वास्थ्य, संतुलन और सुखमय जीवन के लिए अपनाया जा रहा है। किंतु योग का वास्तविक अर्थ केवल शारीरिक व्यायाम, आसन या प्राणायाम तक सीमित नहीं है। संस्कृत में “योग” का अर्थ है – जुड़ना। अर्थात अपने वास्तविक स्वरूप, आत्मा से जुड़ना तथा परमात्मा की सर्वव्यापी दिव्य शक्ति के साथ एकत्व स्थापित करना। शरीर, मन और बुद्धि को संतुलित करने के पश्चात योग की पूर्णता आत्मसाक्षात्कार में प्राप्त होती है। यही योग का अंतिम एवं सर्वोच्च लक्ष्य है।
सहज योग ध्यान इसी आत्मसाक्षात्कार का एक सरल, सहज और अनुभवात्मक मार्ग है। इसकी स्थापना परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी ने 5 मई 1970 को की थी। सहज योग में प्रत्येक व्यक्ति के भीतर स्थित कुंडलिनी शक्ति के जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्रदान किया जाता है। कुंडलिनी के जागृत होने पर साधक के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में संतुलन स्थापित होता है और वह विचारशून्य जागरूकता की अवस्था का अनुभव करता है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें मन अनावश्यक विचारों से मुक्त होकर वर्तमान क्षण में स्थित हो जाता है तथा भीतर गहन शांति, आनंद और संतोष का अनुभव होता है।
सहज योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आत्मसाक्षात्कार कोई कठिन साधना, तपस्या या त्याग का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसे किसी भी आयु, धर्म, जाति, भाषा या सामाजिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति सहजता से प्राप्त कर सकता है। आत्मसाक्षात्कार के पश्चात नियमित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर के सूक्ष्म तंत्र को शुद्ध एवं संतुलित कर सकता है, जिससे उसके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।
आज के तेज़ गति वाले, प्रतिस्पर्धी एवं तनावपूर्ण जीवन में मानसिक अशांति, चिंता, अवसाद, क्रोध तथा असंतुलित जीवनशैली जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में सहज योग ध्यान मानसिक संतुलन, भावनात्मक स्थिरता, एकाग्रता तथा आंतरिक आनंद प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में बेहतर एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं, युवा तनावमुक्त होकर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रह सकते हैं, गृहस्थ जीवन में सामंजस्य बढ़ा सकते हैं तथा वरिष्ठ नागरिक आंतरिक शांति एवं संतोष का अनुभव कर सकते हैं।
सहज योग का लाभ केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता। जब परिवार के सदस्य प्रतिदिन कुछ समय सामूहिक ध्यान करते हैं, तो परिवार में प्रेम, सम्मान, संवाद और सामंजस्य की भावना विकसित होती है। ध्यान के माध्यम से परिवार का वातावरण अधिक शांत, सकारात्मक और आनंदमय बनता है। इस प्रकार सहज योग व्यक्तिगत उत्थान के साथ-साथ सामाजिक एवं पारिवारिक समरसता को भी प्रोत्साहित करता है।
वर्तमान समय में विश्व के 100 से अधिक देशों में लाखों लोग सहज योग का नियमित अभ्यास कर रहे हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों, चिकित्सा संस्थानों और वैज्ञानिक शोधों में भी सहज योग ध्यान के मानसिक एवं शारीरिक लाभों का अध्ययन किया गया है, जिनमें तनाव में कमी, मानसिक शांति, बेहतर एकाग्रता तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे योग के वास्तविक एवं गहन स्वरूप को समझने का प्रयास करें। योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति और आंतरिक परिवर्तन का मार्ग है। सहज योग ध्यान के माध्यम से आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर स्थित शांति, प्रेम और आनंद के स्रोत को अनुभव कर सकता है तथा एक संतुलित एवं सार्थक जीवन की ओर अग्रसर हो सकता है।
अधिक जानकारी हेतु टोल फ्री नंबर 1800-270-0800 पर संपर्क करें अथवा www.sahajayoga.org.in पर जानकारी प्राप्त करें।

