आत्मसाक्षात्कार: सहजयोग द्वारा स्वयं को जानने की सहज यात्रा
अपने आप को जानना ही जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान है। मनुष्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है—"मैं कौन हूँ?" इसी प्रश्न का उत्तर आत्मसाक्षात्कार है। इसका अर्थ है अपने वास्तविक स्वरूप, अर्थात् शुद्ध आत्मा का प्रत्यक्ष अनुभव करना। जब व्यक्ति यह अनुभव करता है कि वह केवल शरीर या मन नहीं, बल्कि एक शाश्वत चेतना है, तभी उसके जीवन में शांति, संतुलन और आनंद का उदय होता है।
सामान्य धारणा रही है कि आत्मसाक्षात्कार केवल कठिन तपस्या या संन्यास से ही संभव है। किंतु द्वारा स्थापित सहजयोग इस धारणा को सरल बनाता है। सहजयोग के अनुसार आत्मसाक्षात्कार प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है और यह सहज, प्राकृतिक तथा अनुभव-आधारित प्रक्रिया से प्राप्त किया जा सकता है।
"सहज" का अर्थ है—जो स्वाभाविक हो, और "योग" का अर्थ है—परम चेतना से मिलन। सहजयोग का आधार यह है कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर स्थित कुण्डलिनी नामक सूक्ष्म आध्यात्मिक शक्ति, उचित परिस्थितियों में स्वाभाविक रूप से जागृत होकर व्यक्ति को आत्मसाक्षात्कार का अनुभव करा सकती है।सहजयोग में ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर स्थित कुण्डलिनी शक्ति के जागरण का अनुभव करता है। यह किसी धर्म, जाति, भाषा या देश तक सीमित नहीं है। गृहस्थ, विद्यार्थी, कर्मचारी या वरिष्ठ नागरिक कोई भी इसका अभ्यास कर सकता है।
नियमित सहजयोग ध्यान से मन शांत होता है, तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है तथा व्यक्ति के भीतर करुणा, संतोष और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित होने लगते हैं। यह संसार से भागने का नहीं, बल्कि जीवन के दायित्व निभाते हुए आंतरिक संतुलन प्राप्त करने का मार्ग है।
अंततः, आत्मसाक्षात्कार स्वयं को जानने की यात्रा है और सहजयोग इस यात्रा को सरल, सहज और सर्वसुलभ बनाता है। यह बताता है कि आध्यात्मिकता केवल आश्रमों या पर्वतों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है। जब मनुष्य स्वयं को जान लेता है, तभी वह संसार को सही दृष्टि से देख पाता है। आत्मसाक्षात्कार से आरंभ होने वाली यह आंतरिक यात्रा ही जीवन को शांति, संतुलन और सच्चे आनंद की दिशा में अग्रसर करती है। सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800-2700-800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं। सहजयोग पूर्णतया निशुल्क है।

