आध्यात्मिक ज्ञान तर्क का नहीं अनुभव का विषय है
"बूझ सरीखी बात है, कहन सरीखी नाहि।
जेते ज्ञानी देखिए, तेते संसै माहि॥" — संत कबीर
संत कबीर के इस अमूल्य दोहे में आध्यात्मिक जीवन का गहन सत्य निहित है। वे कहते हैं कि आत्मसाक्षात्कार और स्व-स्वरूप का ज्ञान तर्क, वाद-विवाद या शब्दों के माध्यम से प्राप्त नहीं होता। यह अनुभव का विषय है। केवल शास्त्रों का अध्ययन या वाचिक ज्ञान मनुष्य को सत्य तक नहीं पहुँचाता; सत्य का बोध तभी होता है जब उसे स्वयं अपने भीतर अनुभव किया जाए।
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा प्रणीत सहजयोग इसी अनुभूति का सहज एवं वैज्ञानिक मार्ग है। यह किसी मत, पंथ या दर्शन का विषय नहीं, बल्कि आत्मसाक्षात्कार की प्रत्यक्ष अनुभूति कराने वाली ध्यान-पद्धति है। सहजयोग का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के भीतर स्थित उस दिव्य चेतना को जागृत करना है, जो उसे मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करती है।
सामान्यतः जब हम ध्यान करने के लिए आँखें बंद करते हैं, तब मन विचारों के अनवरत प्रवाह में उलझा रहता है। अतीत की स्मृतियाँ और भविष्य की चिंताएँ हमें वर्तमान क्षण में स्थिर नहीं रहने देतीं। हम कुछ ही क्षणों के लिए भी पूर्णतः शांत नहीं रह पाते। ऐसे में स्वयं से एक प्रश्न पूछना उचित होगा, क्या मैं एक क्षण के लिए भी निर्विचार रह सकता हूँ?
सहजयोग में साधक को अपने सूक्ष्म तंत्र—सात चक्रों, तीन नाड़ियों (इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना) तथा कुंडलिनी शक्ति—का परिचय कराया जाता है। आत्मसाक्षात्कार के पश्चात कुंडलिनी का जागरण साधक को सुषुम्ना मार्ग से सहस्रार चक्र तक ले जाता है, जहाँ वह निर्विचार चेतना का अनुभव करता है। यह वह अवस्था है जिसमें मन विचारों से परे होकर पूर्ण शांति, जागरूकता और आनंद का अनुभव करता है।
सहजयोग में साधक को साधना के प्रारंभ में ही निर्विचार चेतना का अनुभव प्राप्त हो जाता है। इसके पश्चात आत्मपरीक्षण और नियमित ध्यान के माध्यम से वह अपने चित्त को निर्मल बनाता है, अपने दोषों को पहचानकर उनसे मुक्त होने का प्रयास करता है तथा अपने जीवन को अधिक संतुलित, प्रेमपूर्ण और सदाचारी बनाता है।
सहजयोग की विशेषता यह है कि इसमें आध्यात्मिक ज्ञान केवल सिद्धांत नहीं रहता, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभूति बन जाता है। विभिन्न धर्मग्रंथों में जिस आत्मज्ञान, परम आनंद और ईश्वर से एकत्व का वर्णन उपमाओं एवं दृष्टांतों के माध्यम से किया गया है, सहजयोग में साधक उसे स्वयं अनुभव कर सकता है। यही अनुभव उसके जीवन में स्थायी शांति, करुणा, विवेक और आनंद का संचार करता है।
आज की भागदौड़, तनाव और मानसिक अशांति से भरी जीवनशैली में सहजयोग प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने, अपने भीतर की शांति को पहचानने और एक संतुलित जीवन जीने का सरल एवं प्रभावी मार्ग प्रदान करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूर्णतः सहज, सार्वभौमिक और निःशुल्क है।
अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं।

