सोया मिल्क के नाम पर ‘सफेद ज़हर’ हो रहा सप्लाई
ग्वालियर में बिना एक्सपायरी-डेट और बैच नंबर बिक रहा हेल्थ ड्रिंक
दिव्यानंद अर्गल
ग्वालियर । शहर में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां “तोषिका सोया फूड प्रोडक्ट” नाम की कंपनी पर कथित रूप से बिना मानकों का पालन किए सोया मिल्क बेचने के आरोप लग रहे हैं। जानकारी के अनुसार यह कंपनी ठाठीपुर, मुरार, गोले का मंदिर सहित शहर के कई क्षेत्रों में डेयरी संचालकों को बड़े स्तर पर सोया मिल्क की सप्लाई कर रही है, जिसे प्रतिदिन सैकड़ों जिम जाने वाले युवक और फिटनेस प्रेमी स्वास्थ्यवर्धक पेय समझकर सेवन कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कंपनी द्वारा सप्लाई किए जा रहे पैकेजिंग पाउच पर न तो उत्पादन तिथि अंकित की जा रही है, न बैच नंबर लिखा जा रहा है और न ही समाप्ति तिथि का उल्लेख किया गया है। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी खाद्य पदार्थ की पैकेजिंग पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, निर्माता का विवरण और लाइसेंस संबंधी जानकारी होना अनिवार्य माना जाता है, ताकि उपभोक्ता उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा की जानकारी प्राप्त कर सकें। लेकिन आरोप है कि इस सोया मिल्क में इन बुनियादी नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है।
फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग का शौक रखने वाले युवा मसल्स रिकवरी और प्रोटीन की पूर्ति के लिए बड़ी मात्रा में सोया मिल्क का सेवन करते हैं। जिम ट्रेनर और फिटनेस प्रेमियों के बीच इसे हेल्दी ड्रिंक के रूप में प्रचारित किया जाता है। ऐसे में यदि बिना गुणवत्ता जांच और बिना निर्धारित मानकों वाला उत्पाद बाजार में बेचा जा रहा है तो यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ माना जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई युवक प्रतिदिन नियमित रूप से इस सोया मिल्क का सेवन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह तक जानकारी नहीं कि उत्पाद कब तैयार हुआ, कितने दिन पुराना है और उसका सेवन सुरक्षित भी है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के तैयार खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक खराब या एक्सपायर्ड पेय पदार्थों का सेवन पेट संबंधी संक्रमण, एलर्जी, फूड पॉइजनिंग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर संबंधित विभाग द्वारा इस तरह के उत्पादों की जांच क्यों नहीं की जा रही।
स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि संबंधित कंपनी के उत्पादन स्थल, पैकेजिंग प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों की तत्काल जांच की जानी चाहिए। साथ ही बाजार में सप्लाई किए जा रहे सोया मिल्क के सैंपल लेकर लैब परीक्षण कराया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं तो कंपनी पर कठोर कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस निरस्त किया जाना चाहिए।
शहर में तेजी से बढ़ते फिटनेस कल्चर के बीच युवाओं का भरोसा हेल्थ ड्रिंक्स और प्रोटीन उत्पादों पर बढ़ा है। ऐसे समय में यदि बिना मानकों वाले उत्पाद बाजार में खुलेआम बेचे जा रहे हैं तो यह न केवल नियमों की अवहेलना है बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या कार्रवाई सामने आती है।
वर्जन
सोया मिल्क पैकेजिंग पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी अंकित न होने की सूचना मिली है यह खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है । मैंने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को जांच करने के निर्देश दिए हैं लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
- डॉ सचिन श्रीवास्तव , मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, ग्वालियर

