टेक्नोलॉजी भारत के DNA में: प्रधानमंत्री मोदी ने पेश किया AI शासन का पांच-स्तंभीय 'MANAV' फ्रेमवर्क

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राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे भविष्य का गवाह बन रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दिशा और दशा तय की जा रही है। 'India AI Impact Summit 2026' के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्माता बनकर उभरा है। इस शिखर सम्मेलन ने साबित कर दिया है कि वैश्विक मंच पर AI को लेकर होने वाली चर्चाएं अब भारत के बिना अधूरी हैं। इसी के साथ पीएम मोदी ने कहा, टेक्नोलॉजी बनाना और अपनाना दोनों भारत के DNA में है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में तेजी से उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए मानव-केंद्रित और समावेशी दृष्टिकोण का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का उद्देश्य 'AI-केंद्रित' न होकर 'मानव-केंद्रित' होना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में AI शासन के लिए ‘MANAV’ फ्रेमवर्क पेश किया।
प्रधानमंत्री ने एआई को मानव कल्याण और समावेशी मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए MANAV के पांच स्तंभ बताए:-
M – Moral (नैतिक): AI प्रणालियों का मार्गदर्शन नैतिक जिम्मेदारी और मूल्यांकन से होना चाहिए।
A – Accountable (जवाबदेह): शासन व्यवस्था पारदर्शिता, नियमों और निगरानी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करे।
N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता): किसी देश में उत्पन्न डेटा उसी देश का होना चाहिए और उसके नियंत्रण में रहना चाहिए।
A – Accessible & Inclusive (सुलभ और समावेशी): AI प्रणाली समाज के सभी वर्गों के लिए सुलभ हो और समावेशिता को बढ़ावा दे।
V – Valid (वैध और विश्वसनीय): AI कानूनन वैध, भरोसेमंद और प्रमाण्य हो।
प्रधानमंत्री का संदेश: 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सभी के लिए कल्याण और सभी के लिए खुशहाली हमारी मापदंड है। मनुष्य केवल डेटा पॉइंट या AI के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए। हमें AI को विकसित होने के लिए खुला क्षेत्र देना चाहिए, लेकिन नियंत्रण हमारे हाथ में रहना चाहिए।” प्रधानमंत्री ने मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि एआई का विकास लोकतांत्रिक, पारदर्शी और समावेशी होना चाहिए, ताकि तकनीक समाज के प्रत्येक हिस्से के लिए लाभकारी बने।
साभार पंजाब केसरी

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