मुरम की खुदाई से शुरू हुआ मामला, पत्रकार पर पैसों की तोहमत तक पहुंचा! छुरा में आखिर किसका खेल?

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गरियाबंद में वैध मुरम खदान नहीं होने की बात, फिर पिपराही से शासकीय सड़क तक कैसे पहुंची मुरम? टेंडर, बिल और कथित वीडियो जांच के घेरे में
छुरा। गरियाबंद जिले के छुरा राजस्व क्षेत्र में मुरम खनन को लेकर उठे सवाल अब केवल खनन तक सीमित नहीं रह गए हैं। छुरा से कोसमबूढ़ा पीडब्ल्यूडी मार्ग के किनारे सोल्डर में मुरम बिछाने का कार्य चल रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार मुरम पिपराही क्षेत्र से लाकर उपयोग की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिले में वैध मुरम खदान संचालित नहीं होने की बात सामने आ रही है, तो शासकीय कार्य में उपयोग की जा रही मुरम का स्रोत क्या है?

शासकीय कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री के लिए बिल, वैध स्रोत और संबंधित दस्तावेज जरूरी होते हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि उक्त कार्य के लिए कोई टेंडर भी नहीं हुआ है। ऐसे में कार्य किस आदेश पर चल रहा है, मुरम की आपूर्ति कौन कर रहा है और भुगतान किस बिल के आधार पर होगा, यह जांच का विषय है।

कवरेज करने पहुंचे पत्रकार पर ही पैसों की मांग का आरोप

इसी मामले की कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मी के साथ राज सिन्हा द्वारा कथित रूप से रोक-टोक किए जाने का आरोप है। मीडियाकर्मी का कहना है कि वह केवल फोटो-वीडियो लेकर संबंधित विभाग से पुष्टि के बाद समाचार प्रकाशित करने पहुंचा था।

मीडियाकर्मी के अनुसार बातचीत के दौरान राज सिन्हा द्वारा बार-बार पैसों की बात की गई और कथित रूप से “कितना पैसा चाहिए, बताओ” जैसे सवाल किए गए। पत्रकार का कहना है कि उसने लगातार स्पष्ट किया कि वह किसी प्रकार की राशि की मांग नहीं कर रहा है और उसका उद्देश्य केवल समाचार संकलन है।

वीडियो बनवाकर पत्रकार को फंसाने की कोशिश का आरोप

मीडियाकर्मी का आरोप है कि राज सिन्हा ने अपने साथियों से पूरी बातचीत का वीडियो बनवाया और बाद में उस पर पैसों की मांग करने का आरोप लगाने का प्रयास किया। पत्रकार का दावा है कि उसकी छवि खराब करने के उद्देश्य से बातचीत को कथित रूप से एक दिशा में ले जाने की कोशिश की गई।

मीडियाकर्मी के अनुसार कथित पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग राज सिन्हा के मोबाइल में मौजूद है। ऐसे में निष्पक्ष जांच में मूल वीडियो की शुरुआत से अंत तक जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि पैसों की बात किसने शुरू की और बातचीत वास्तव में किस संदर्भ में हुई।

तहसीलदार बोले—जिले में मुरम खनन संचालित नहीं

मामले की जानकारी कलेक्टर रणवीर शर्मा को दूरभाष से दी गई। वहीं तहसीलदार रमेश मेहता ने बताया कि उनके संज्ञान में जानकारी आई है और गरियाबंद जिले में कहीं भी मुरम खनन संचालित नहीं होने की जानकारी है। मामले में कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यही है—जब वैध खदान नहीं, तो मुरम कहां से आई? कार्य किसके आदेश पर हुआ? बिल किसके नाम बनेगा और पत्रकार पर लगाए गए पैसों की मांग के आरोपों का सच वीडियो में क्या है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

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