पत्नी और नाबालिग पुत्र के अंतरिम भरण-पोषण की मांग खारिज
अधिवक्ता रजत श्रीराम सौंधी की प्रभावी पैरवी से प्रतिपक्षी को मिली महत्वपूर्ण राहत
इंदौर। कुटुम्ब न्यायालय, इंदौर ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पत्नी एवं नाबालिग पुत्र की ओर से अंतरिम भरण-पोषण के लिए प्रस्तुत आवेदन को निरस्त कर दिया। प्रार्थिनी ने स्वयं तथा अपने नाबालिग पुत्र के लिए धारा 144 बीएनएसएस के अंतर्गत अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की आय एवं आर्थिक स्थिति से संबंधित दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इनमें आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट सहित अन्य दस्तावेज शामिल थे। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों एवं दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति का परीक्षण किया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी न्यायालय के समक्ष आया कि नाबालिग पुत्र अपनी माता के साथ रह रहा है। साथ ही प्रार्थिनी की आय एवं आर्थिक स्थिति से संबंधित दस्तावेजों को भी न्यायालय ने विचार में लिया।
उपलब्ध दस्तावेजों और वर्तमान परिस्थितियों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने अंतरिम भरण-पोषण प्रदान किए जाने का आधार नहीं पाया और इस संबंध में प्रस्तुत आवेदन को निरस्त कर दिया।
अधिवक्ता रजत श्रीराम सौंधी ने मजबूती से रखा प्रतिपक्षी का पक्ष
प्रकरण में प्रतिपक्षी की ओर से अधिवक्ता श्री रजत श्रीराम सौंधी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष पक्षकार की आर्थिक स्थिति, आय से संबंधित अभिलेख एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए अंतरिम भरण-पोषण की मांग का विरोध किया।
अधिवक्ता रजत श्रीराम सौंधी की पैरवी के बाद न्यायालय द्वारा अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन निरस्त किए जाने से प्रतिपक्षी को महत्वपूर्ण राहत मिली।
— रणजीत टाइम्स

