40-50 गांवों की सेहत भगवान भरोसे: बामौरकलां PHC में डॉक्टर नहीं, सिर्फ दो कर्मचारियों के सहारे चल रही स्वास्थ्य व्यवस्था
30 साल पुराने स्वास्थ्य केंद्र में अधिकांश पद रिक्त, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार
अतुल जैन
बामौरकलां। शिवपुरी जिले के अंतिम छोर पर स्थित बामौरकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर वर्षों से चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि लगभग 40 से 50 गांवों की आबादी को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-346 (भिंड-भोपाल मार्ग) पर स्थित होने के बावजूद क्षेत्र के लोगों को मामूली उपचार के लिए भी दूर-दराज के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार तथा क्षेत्र में भाजपा विधायक होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। चिकित्सकों और स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
(1996 में हुआ था स्वास्थ्य केंद्र का शुभारंभ)
बामौरकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का शुभारंभ 28 अक्टूबर 1996 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री प्रेम नारायण ठाकुर ने तत्कालीन विधायक के.पी. सिंह की अध्यक्षता में किया था। स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, एएनएम, कंपाउंडर, नेत्र सहायक, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट एवं वार्ड बॉय सहित कुल 10 पद स्वीकृत हैं।
लेकिन वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। यहां केवल एक एएनएम और एक फार्मासिस्ट ही कार्यरत हैं, जबकि शेष सभी पद वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र का संचालन नाममात्र के संसाधनों से किया जा रहा है।
(झोलाछाप डॉक्टरों का बढ़ रहा नेटवर्क)
चिकित्सकों की कमी का फायदा झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। मजबूरी में ग्रामीण इन्हीं के पास उपचार कराने पहुंचते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसी भी समय गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
(आठ उप स्वास्थ्य केंद्र भी स्टाफ संकट से प्रभावित)
खनियांधाना ब्लाक बामौरकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आठ उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इनमें से कई केंद्रों पर भी पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन कार्यक्रम और अन्य स्वास्थ्य योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
(पूरे खनियांधाना ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाएं संकट में)
खंड चिकित्सा अधिकारी ने स्वीकार किया है कि केवल बामौरकलां ही नहीं बल्कि पूरे खनियांधाना विकासखंड में स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार विकासखंड के 41 सब-सेंटरों में से 23 सब-सेंटर ऐसे हैं जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) नहीं हैं। 19 सब-सेंटरों में एएनएम के पद रिक्त हैं, जबकि 6 सब-सेंटर ऐसे हैं जहां एएनएम और CHO दोनों ही उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा 16 सब-सेंटरों में आशा सुपरवाइजर के पद भी खाली पड़े हैं।
विकासखंड के तीनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र—बामौरकलां, मुहारीकलां और अछरौनी—वर्तमान में चिकित्सक विहीन हैं। इसके अलावा अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के अधिकांश पद भी रिक्त हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
(वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए प्रस्ताव)
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार किया जा रहा है। विभाग द्वारा मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि शासन स्तर पर जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
(जनता की मांग—तत्काल हो नियुक्तियां)
क्षेत्रीय जनता ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह लोधी तथा जिला कलेक्टर से मांग की है कि वर्षों से रिक्त पड़े चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के पदों को तत्काल भरा जाए, ताकि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
(इनका कहना है )
हमारे पूरे खनियांधाना ब्लॉक में बहुत सारे पद रिक्त हैं, जिसके संबंध में हम समय-समय पर स्टाफ मानव संसाधन उपलब्ध कराने हेतु पत्राचार कर रहे हैं और प्रयास किए जा रहे हैं कि रिक्त स्थानों पर मानव संसाधन उपलब्ध हो सकें। हमारे पूरे विकासखंड में 41 सब-सेंटर हैं, जिनमें से 23 सब-सेंटर में CHO नहीं है हमारे पास, एवं 19 सब-सेंटर में हमारे पास ANM भी नहीं हैं, एवं 6 सब-सेंटर ऐसे हैं जिनमें ANM एवं CHO दोनों ही पदस्थ नहीं हैं। एवं हमारे पास 16 सब-सेंटर ऐसे हैं जिनमें आशा सुपरवाइजर के पद रिक्त हैं। इसी प्रकार हमारे तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बामौरकलां, मुहारीकलां एवं अछरौनी, तीनों ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक विहीन संस्थाएं हैं। इसी प्रकार हमारे विकासखंड में भी कुछ चिकित्सक और अन्य पैरामेडिकल के पद हैं, उनमें से अधिकांश पद रिक्त हैं, जिससे हमारी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और इसके संबंध में हमने वरिष्ठ अधिकारियों से पत्राचार किया है और प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द इन पदों पर हमें मानव संसाधन उपलब्ध हो सकें। जो अभी हमारी चर्चा हुई है और जो हमने वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में पूरा परिपत्र लाया है तो हमें यह आश्वस्त किया गया है कि जल्द ही उन पदों पर मानव संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, एवं इस दिशा में निरंतर प्रयास हो रहे हैं।

(अरुण झाक्या , बीएमओ खनियांधाना)

