उच्च न्यायालय ने आरटीओ को बस परमिट प्रकरण एक सप्ताह में निराकरण करने के दिए निर्देश

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राजेश धाकड़ 
इंदौर। आरटीओ कार्यालय में बस परमिटों को लेकर हो रही अनियमितताओं एवं लंबित प्रकरणों के चलते एक बस संचालक को माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेना पड़ी। मामले में सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर ने संबंधित आरटीओ अधिकारी को बस परमिट प्रकरण का निराकरण 7 दिवस के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस परमिट से संबंधित प्रकरण लंबे समय से लंबित होने एवं आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली में कथित लापरवाही के चलते पीड़ित बस संचालक ने अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई माननीय एकलपीठ न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा के समक्ष हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रणव रामविलास वर्मा ने पक्ष रखते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि आरटीओ की धीमी एवं लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण बस संचालक को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। समय पर आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं होने से परिवहन व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा था।
मामले की सुनवाई के बाद माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित आरटीओ अधिकारी को निर्देशित किया कि बस परमिट संबंधी प्रकरण का निराकरण 7 दिवस की अवधि में किया जाए।
अधिवक्ता प्रणव वर्मा ने बताया कि न्यायालय के इस आदेश से परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई हो, तो आम नागरिकों और व्यवसायियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
माननीय न्यायालय द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए जारी किए गए निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें आरटीओ कार्यालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।

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