न्याय प्रक्रिया में आएगी तेजी: कैबिनेट का फैसला, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर होगी 38

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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत न्यायाधीशों की संख्या को वर्तमान 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में 33 न्यायाधीश और प्रधान न्यायाधीश हैं। इस संख्या को चार और बढ़ाने के लिए संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा। संसद द्वारा विधेयक पारित होने के बाद, उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की संख्या 38 हो जाएगी।
कब-कब बढ़ाई गई सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या
मूल रूप से लागू उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) कानून 1956 में प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 10 निर्धारित की गई थी।
उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा इस संख्या को बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और कानून में एक अन्य संशोधन द्वारा इसे बढ़ाकर 17 कर दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 के तहत प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी गई थी।
इसके बाद, 2009 में एक नए संशोधन के माध्यम से शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई।
उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 पारित होने के साथ शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या आखिरी बार 30 से बढ़ाकर 33 (प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर) की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति और योग्यता
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम के माध्यम से होती है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जज शामिल होते हैं।सेवानिवृत्ति: सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।योग्यता: जज बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना, किसी हाई कोर्ट में कम से कम 5 साल तक जज रहना या 10 साल तक वकील रहना आवश्यक है।
साभार नवभारत टाइम्स 

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