पूर्वजों पर टिप्पणी से उबल उठा परमार समाज — राजा भोज के वंशजों का अपमान करने पर कुणाल चौधरी विवादों में
_सूर्या परमार शुजालपुर
शुजालपुर/कालापीपल। मध्यप्रदेश में एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कालापीपल के पूर्व विधायक कुणाल चौधरी द्वारा मंत्री इंदर सिंह परमार को लेकर की गई टिप्पणी में “पूर्वजों” का संदर्भ जोड़ने पर परमार समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। चौधरी ने अपने पोस्ट में लिखा था कि—
“जिनके पूर्वज अंग्रेजों के सामने घुटने टेककर माफी मांगते रहे…”
इस वाक्य को परमार समाज के लोगों ने सीधे-सीधे वंश और इतिहास पर चोट के रूप में लिया है।
_परमार समाज की प्रतिक्रिया: “हम राजा भोज के वंशज, इतिहास झुकने का नहीं—लड़ने का है”
कुणाल चौधरी के बयान के बाद परमार समाज में नाराज़गी की लहर दौड़ पड़ी। समाजजनों ने कहा कि यह टिप्पणी न केवल असत्य है, बल्कि परमार वंश की गौरवशाली परंपरा का अपमान भी करती है।
समाज के लोगों ने कहा कि परमार वंश का इतिहास वीरता, ज्ञान, प्रशासन और स्वाभिमान का इतिहास है।
राजा भोज जैसे महान सम्राट इस वंश में हुए, जिनका नाम आज भी भारतीय इतिहास को गौरवान्वित करता है।
_राजा भोज — परमार वंश का गौरव
लोगों ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि—
राजा भोज मध्यकालीन भारत के सबसे शक्तिशाली और विद्वान राजाओं में से एक थे।
वे साहस, न्याय, साहित्य, संस्कृति और युद्ध कौशल—सभी में अद्वितीय थे।
उनके शासन को “भोज-काल” कहा जाता है, जिसे भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है।
परमार वंश के योद्धाओं ने कभी किसी विदेशी सत्ता के आगे ज़ुबान नहीं झुकाई, सिर नहीं झुकाया।
समाजजनों का कहना है कि ऐसी विरासत पर “अंग्रेजों के सामने झुकने” जैसी टिप्पणी करना न केवल ऐतिहासिक रूप से गलत है, बल्कि समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम भी है।
_सोशल मीडिया पर उबाल: “राजनीति मुद्दों पर करें, समाज और पूर्वजों पर नहीं
कुणाल चौधरी की पोस्ट वायरल होने के बाद परमार समाज के युवाओं और वरिष्ठजनों ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज की।
लोगों का कहना है कि _राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी समाज, जाति या वंश के पूर्वजों पर टिप्पणी करना शोभनीय नहीं है।
समाज के कई सदस्यों ने कहा—
“हम परमार हैं। हमारे पूर्वजों ने इतिहास लिखा है, _किसी के आगे घुटने नहीं मोड़े।”
_समाज की चेतावनी: “मर्यादा में रहें, वंश पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं
स्थानीय परमार समाज संगठनों ने साफ कहा कि वे अपनी विरासत और सम्मान पर चोट करने वाली किसी भी टिप्पणी को स्वीकार नहीं कर सकते।
समाज का कहना है कि यदि राजनीतिक बयानबाज़ी करनी है, तो मुद्दों पर की जाए,
वंश, जाति और पूर्वजों को राजनीति में घसीटने की परंपरा बेहद गलत है।
समाजजनों ने कहा कि वे सब कुछ सह सकते हैं,
लेकिन अपने पूर्वजों और परमार वंश की गरिमा पर की गई टिप्पणी नहीं।
_स्थानीय समाज का संदेश
_हम राजा भोज के वंशज हैं
_सम्मान हमारा संस्कार है
और जवाब देना हमारी परम्परा

