दीपावली का वास्तविक संदेश है अंतस्थ आनंदमयी दिव्य चेतना की जागृति
दीपावली केवल दीप जलाने, घर सजाने और धन-समृद्धि की कामना करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन को प्रकाशित करने और जीवन में दिव्य चेतना का स्वागत करने का अनुपम अवसर है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में दीपावली का संबंध श्री महालक्ष्मी तत्व की आराधना से भी है। किंतु आज के भौतिकतावादी परिवेश में लक्ष्मी को प्रायः केवल धन-संपत्ति तक सीमित कर दिया गया है। परिणामस्वरूप मनुष्य के पास भौतिक सुविधाएं बढ़ने के बावजूद उसके जीवन में संतुष्टि, शांति और वास्तविक आनंद का अभाव बना रहता है।
परम पूज्य श्री माताजी श्री निर्मला देवी जी ने सहजयोग के माध्यम से श्री महालक्ष्मी तत्व का अत्यंत गहन एवं व्यावहारिक स्वरूप समझाया है। उनके अनुसार, महालक्ष्मी तत्व केवल बाहरी समृद्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर संतुलन, पवित्रता, विवेक, गरिमा, सद्भाव और आध्यात्मिक उन्नति स्थापित करने वाली दिव्य शक्ति है।
सहजयोग ध्यान पद्धति में श्री माताजी ने बताया है कि मनुष्य के भीतर स्थित कुंडलिनी शक्ति के जागरण से आत्मसाक्षात्कार की अनुभूति संभव है। इसके पश्चात ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की सूक्ष्म शक्तियों को अनुभव करता है। यह अनुभूति केवल विचारों या मान्यताओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शांति, संतुलन और चैतन्य की प्रत्यक्ष अनुभूति के रूप में जीवन में अभिव्यक्त होती है।
श्री माताजी के संदेश का सार यही है कि श्री महालक्ष्मी तत्व का सर्वोच्च आशीर्वाद केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में आनंदित रहने की क्षमता प्राप्त करना है। जब मनुष्य भीतर से संतुष्ट, शांत और आनंदमय होता है, तभी उसकी वास्तविक समृद्धि पूर्ण होती है।
इस दीपावली आइए, बाहरी दीपों के साथ अपने भीतर भी आत्मज्ञान का दीप प्रज्वलित करें और सहजयोग ध्यान के माध्यम से शाश्वत आनंद की ओर कदम बढ़ाएं।
कुंडलिनी जागरण एवं आत्मसाक्षात्कार की सहज अनुभूति प्राप्त करने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-270-0800 अथवा वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर जानकारी प्राप्त करें। सहजयोग पूर्णतया निशुल्क है।

