गंभीर घायलों को तीन घंटे बैठाया फिर भेजा महू सिविल अस्पताल

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प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गवली पलासिया का मामला
रिपोर्टर.... जितेन्द्र वर्मा ब्यूरो रिपोर्ट
महू तहसील की स्वास्थ्य सुविधा कितनी सुस्त है इसका उदाहरण गत दिनों देखने को मिला जब गंभीर घायलों को तीन घंटे इंतजार कराने के बाद बिना उपचार के महू भेज दिया। उपचार न करने का कारण मात्र यह था कि एमएलसी ना बनाना पड़े। बड़गोंदा थाना क्षेत्र के गांव में आपसी विवाद में तीन लोग सचिन, लखन और विनोद निवासी ग्राम कोलंबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इनके सिर में चोट आई थी। पुलिस तीनों को उपचार के लिए गवली पलासिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। यहां पर तीनों घायल को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बैठाए रखा और बाद में कहा कि यहां पर्याप्त सुविधा नहीं है, खास कर टांके लगाने वाले नहीं हैं। पुलिस जवान दोपहर 1 बजे तीनों घायलों को महू शासकीय मध्य भारत अस्पताल लाए, जहां तीनों का उपचार किया गया। बताया जाता हैं कि इस केंद्र में दो चिकित्सक और दो सहयोगी स्टाफ है। उपचार नहीं करने का मुख्य कारण एमएलसी बनाना है जो कि यहां के चिकित्सक बनाना नहीं चाहते थे, क्योंकि बाद में आरोपियों की गिरफ्तारी फिर न्यायालय में बयान देने आना होता हैं जिससे चिकित्सक बचना चाहते हैं। महू शासकीय मध्य भारत अस्पताल में उपचार कर तो दिया, लेकिन एमएलसी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक डॉ. मयंक को बुलवाया गया। चर्चा है कि की आसपास के स्वास्थ्य केन्द्र पर अक्सर ऐसी लापरवाही आम बात है। घायलों का उपचार करने के बजाय महू भेज दिया जाता है। मृतकों का पोस्टमार्टम करने का दबाव भी महू के चिकित्सकों पर रहता है।

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