"5 लाख पेंशनर्स की पीड़ा पहुंची सरकार तक, लंबित मांगों के निराकरण हेतु सौंपा ज्ञापन"

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(महंगाई राहत, स्वास्थ्य बीमा, सातवें वेतनमान का एरियर और न्यायालयीन आदेश लागू करने सहित कई मुद्दे उठाए)
अतुल जैन 
खनियाधाना। मध्यप्रदेश के लाखों पेंशनर्स की वर्षों से लंबित मांगों और समस्याओं के निराकरण को लेकर प्रोग्रेस पेंशनर्स एसोसिएशन शाखा खनियाधाना ने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन नायब तहसीलदार रामनरेश आर्य को सौंपा। ज्ञापन में प्रदेश के लगभग 5 लाख पेंशनर्स से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.डी. स्वर्णकार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आर्थिक, स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इससे पेंशनर्स और उनके परिवारों में गहरी निराशा व्याप्त है।
(केंद्र के समान लाभ देने की मांग)
ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार के पेंशनर्स को जहां समय-समय पर महंगाई राहत और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, वहीं मध्यप्रदेश के पेंशनर्स को कई लाभों से वंचित रखा जा रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। संगठन ने मांग की कि राज्य के पेंशनर्स को भी केंद्र सरकार की तर्ज पर सभी सुविधाएं एवं आर्थिक लाभ प्रदान किए जाएं।
(स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रीमियम का विरोध)
पेंशनर्स संगठन ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना में पेंशनर्स से 4 प्रतिशत प्रीमियम लिए जाने के प्रावधान पर आपत्ति जताई है। ज्ञापन में कहा गया कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ही उनकी आय का प्रमुख साधन होती है, ऐसे में अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। संगठन ने पेंशनर्स से किसी भी प्रकार का प्रीमियम न लेने की मांग की।
(वर्षों तक लटके रहते हैं आर्थिक लाभ)
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पेंशनर्स को मिलने वाले विभिन्न वित्तीय लाभों और एरियर का भुगतान समय पर नहीं किया जाता। कई मामलों में लाभ राशि 4 माह से लेकर 58 माह तक विलंब से मिलती है। संगठन ने कहा कि यह स्थिति पेंशनर्स के अधिकारों का हनन है और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
(सातवें वेतनमान का एरियर और बकाया राशि शीघ्र मिले)
पेंशनर्स ने ज्ञापन के माध्यम से सातवें वेतनमान के लंबित एरियर एवं अन्य बकाया भुगतान को तत्काल जारी करने की मांग की। साथ ही कहा कि विलंब से भुगतान होने पर संबंधित राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज भी दिया जाना चाहिए।
(न्यायालय के आदेश लागू करने की मांग)
ज्ञापन में विभिन्न न्यायालयों द्वारा पेंशनर्स के हित में दिए गए निर्णयों का उल्लेख करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि कई मामलों में न्यायालय के आदेशों के बावजूद पेंशनर्स को उनका वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
(80 वर्ष के अतिरिक्त लाभ की आयु सीमा में संशोधन की मांग)
पेंशनर्स एसोसिएशन ने मांग की कि वर्तमान में 80 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर मिलने वाला 20 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ 79 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर ही प्रदान किया जाए, ताकि वृद्ध पेंशनर्स को समय पर उसका लाभ मिल सके।
(उपदान राशि कर्मचारियों की तरह देने की मांग)
ज्ञापन में कर्मचारियों की भांति पेंशनर्स को भी उपदान (ग्रेच्युटी) राशि का लाभ दिए जाने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि यह उनका अधिकार है और इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
(समस्याओं के संवेदनशील समाधान की अपील)
ज्ञापन के अंत में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि प्रदेश के लाखों पेंशनर्स की समस्याओं पर मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाए। संगठन ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन शासन-प्रशासन की सेवा में लगाया, उनके सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। नायब तहसीलदार रामनरेश आर्य ने ज्ञापन प्राप्त कर इसे शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

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