साईखेड़ाकला में बन रही पुलिया की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, जांच की मांग

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महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
बुरहानपुर जिले के खकनार ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत साईखेड़ाकला में इन दिनों निर्माणाधीन एक पुलिया का कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा और विवादों का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों और क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने इस पुलिया निर्माण की कार्यशैली और गुणवत्ता को लेकर असंतोष व्यक्त किया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है।

तेज बहाव क्षेत्र में निर्माण, मजबूती को लेकर आशंकाएं

स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पुलिया जिस स्थान पर बनाई जा रही है, वहां वर्षाकाल के दौरान पानी का भराव और बहाव की गति काफी अधिक रहती है। ऐसे में निर्माण कार्य में अत्यधिक तकनीकी सतर्कता और मजबूती की आवश्यकता होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान तकनीकी मापदंडों का पूरी तरह पालन नहीं दिखाई दे रहा है। लोगों ने आशंका जताई है कि पुलिया के बेस (नींव) में प्राक्कलन के अनुरूप सरिये का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया है, जिससे भविष्य में इसके टिकाऊपन पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही, कार्य में उपयोग की जा रही रेत की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री में अमानक स्तर की चीजों का मिश्रण दिख रहा है, जिसकी जांच होना जरूरी है।

उपयंत्री के भौतिक सत्यापन पर उठे सवाल

किसी भी पंचायत स्तरीय निर्माण कार्य में तकनीकी देखरेख और समय-समय पर भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित उपयंत्री (सब-इंजीनियर) की होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को दिशा-निर्देश दें, तो गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। क्षेत्रवासियों को डर है कि यदि इस समय ध्यान नहीं दिया गया, तो आगामी बारिश में होने वाले किसी भी नुकसान को 'अत्यधिक वर्षा' का बहाव बताकर टाल दिया जाएगा, जिससे शासकीय राशि का नुकसान हो सकता है।

जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी, जवाब देने से कतरा रहे अधिकारी

इस पूरे मामले में निष्पक्षता और वास्तविकता जानने के लिए जब संबंधित उपयंत्री से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे बात नहीं हो सकी। इसके पश्चात जब प्रभारी सचिव से इस विषय पर जानकारी चाही गई, तो उन्होंने इस संबंध में सीधे सरपंच से बात करने की सलाह देकर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया।
शासकीय निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य को पूरी तरह प्राक्कलन के अनुसार पारदर्शी तरीके से कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना या नुकसान से बचा जा सके। अब देखना होगा कि इस विषय पर वरिष्ठ अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं।

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