कौन है देश का सच्चा सेवक?
कौन है देश का सच्चा सेवक,
कौन है सच्चा योद्धा?
आज वतन से पूछ रहा हूँ—
भारत का रखवाला कौन?
वो जवान,
जो बर्फीली रातों में जागता है,
अपना घर-परिवार छोड़कर
सरहद पर तिरंगा संभालता है।
जिसके लिए अपनी साँसों से पहले
देश की आन होती है—
क्या वही सच्चा योद्धा है?
या वो किसान,
जो मिट्टी में पसीना बहाता है,
खुद धूप में जलकर भी
पूरे देश का पेट भरता है।
जिसके हाथों की मेहनत से
हर घर में रोटी आती है—
क्या वही सच्चा सेवक है?
या वो नेता,
जिसके कंधों पर देश चलाने की जिम्मेदारी है,
जिसकी नीयत में जनता
और फैसलों में राष्ट्रहित होना चाहिए।
जो कुर्सी को सत्ता नहीं,
सेवा का अवसर समझे—
क्या वही सच्चा सेवक है?
या फिर वो युवा,
जिसकी आँखों में नया भारत है,
जिसके हाथों में हुनर
और दिल में हिंदुस्तान है।
जो आज मेहनत करेगा,
वही कल देश की तकदीर लिखेगा—
क्या वही सच्चा योद्धा है?
मैं कहता हूँ—
इनमें से कोई एक नहीं,
ये चारों ही भारत की ताकत हैं।
जवान देश की ढाल है,
किसान देश की जान है,
ईमानदार नेता देश की दिशा है,
और युवा देश का भविष्य है।
सच्चा सेवक वह है,
जो अपने हिस्से का फर्ज निभाता है।
जो देश से पूछता नहीं—
“मुझे क्या मिला?”
बल्कि खुद से पूछता है—
“मैंने देश को क्या दिया?”
ना वर्दी अकेली सेवा की पहचान है,
ना कुर्सी अकेली सम्मान की हकदार है।
जिसके दिल में राष्ट्र पहले है,
वही भारत का सच्चा पहरेदार है।
किसान का पसीना हो,
जवान का बलिदान हो,
युवा की मेहनत हो,
या नेतृत्व का ईमान हो—
जब सबका एक ही संकल्प हो—
“मैं नहीं, मेरा देश पहले!”
तभी भारत महान है,
तभी तिरंगे की शान है।
जो जिए तो देश के लिए,
जो लड़े तो देश के लिए,
जो मेहनत करे तो देश के लिए—
वही सच्चा सेवक,
वही सच्चा योद्धा,
वही सच्चा हिंदुस्तानी है।
— कवि गोपाल गावंडे

