अष्टभुजा दुर्गा की शक्ति का प्रतिरूप है स्त्री

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स्त्री केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि सृजन, करुणा, सहनशीलता और परिवर्तन की प्रतीक भी है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा मानने की परंपरा रही है। अष्टभुजा दुर्गा इसी असीम शक्ति, सामर्थ्य और सृजनशीलता का प्रतीक हैं। स्त्री की विशिष्टता इस बात में निहित है कि वह स्वयं के साथ-साथ परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रकृति का प्रत्येक तत्व अपने मूल स्वभाव के अनुरूप कार्य करता है। करोड़ों वर्षों की उत्क्रांति के पश्चात मनुष्य ने अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। मानव जीवन में स्त्री और पुरुष दोनों की भूमिकाएं महत्वपूर्ण हैं। जिस प्रकार प्रकृति में प्रत्येक तत्व का अपना विशेष कार्य है, उसी प्रकार स्त्री और पुरुष भी अपनी विशिष्टताओं के साथ जीवन को संतुलित और समृद्ध बनाते हैं।
स्त्री की शक्ति केवल उसकी शारीरिक क्षमता में नहीं, बल्कि उसकी संवेदनशीलता, धैर्य, दूरदर्शिता और निर्माण करने की क्षमता में भी निहित है। एक सच्चे निर्माता का हृदय विशाल होता है और उसकी सोच सीमित दायरों में बंधी नहीं होती। यही गुण स्त्री को परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।
श्री माताजी निर्मला देवी जी ने स्त्री की इसी विशिष्टता को प्रकृति के उदाहरण के माध्यम से समझाया है। वर्ष 1988 में पेरिस में दिए गए अपने प्रवचन ‘इंट्यूशन एंड विमेन’ में उन्होंने स्त्री की तुलना धरती माता से और पुरुष की तुलना सूर्य से की। उन्होंने बताया कि धरती माता बिना किसी शिकायत के हमें सुंदर फूल, पेड़-पौधे और जीवनदायी पोषण प्रदान करती है। वह अनेक कठिनाइयों को सहन करते हुए भी सृजन और संरक्षण का कार्य निरंतर करती रहती है। सूर्य और पृथ्वी दोनों अपनी-अपनी विशिष्ट भूमिकाओं के कारण प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हैं।
यह विचार हमें प्रेरित करता है कि स्त्री को अपनी आंतरिक शक्ति और विशिष्टता को पहचानना चाहिए। दूसरों का अंधानुकरण करने के बजाय अपनी सहज प्रकृति, आत्मविश्वास और सृजनशीलता को विकसित करना ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है।
दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश विशेष महत्व रखता है। श्री माताजी निर्मला देवी जी के अनुसार, आत्मसाक्षात्कार के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर निहित दिव्य शक्ति को पहचान सकता है। कुंडलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति टोल-फ्री नंबर 18002700800    या sahajayoga.org.in   संपर्क कर सकते हैं।
सहजयोग पूर्णतया निशुल्क है।

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