सहजयोग, व्यष्टि से समष्टि बनने की आध्यात्मिक यात्रा
अखंमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम् । तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री ...
पाँचवाँ चक्र विशुद्धि चक्र के नाम से जाना जाता है। मनुष्य की गर्दन में इसकी रचना है, इसमें सोलह पंखुड़ियाँ होती है जो कान, नाक, गला जिव्हा तथा दाँतो आदि की देखभाल करती है। दूसरों से सम्पर्क स्थापित कर...
Read moreदिल्ली में आज से केवल बीएस-6 मानक वाले वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। साथ ही पेट्रोल पंपों पर बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के ईंधन देने पर रोक लगाने की खबर के बीच बुधवार सुबह...
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