जनसुनवाई में पहुंचा सूरजपुरा का ग्रामीण, अब तक नहीं मिला आवास; पंचायत में सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक की कुर्सियां मिलीं खाली
शिवम् प्रजापति
मेहंदवानी। जनपद पंचायत मेहंदवानी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सूरजपुरा में आवास से जुड़ी समस्या का मामला सामने आया है। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में सूरजपुरा गांव के निवासी गोधनदास पनरिया अपनी समस्या लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके आवास का लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है, जबकि उनके द्वारा संबंधित आवेदन और आवश्यक जानकारी पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक आवास नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आवेदन देने के बाद भी आवास का इंतजार
जनसुनवाई में अपनी समस्या बताते हुए गोधनदास पनरिया ने कहा कि वह अपने आवास के संबंध में पहले भी आवेदन कर चुके हैं और आवश्यक जानकारी भी दे चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक उन्हें आवास का लाभ नहीं मिला है। इसी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर वह मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे, ताकि उनकी समस्या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचे और उन्हें शासन की आवास योजना का लाभ मिल सके।
ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गोधनदास पनरिया की आवास संबंधी समस्या का निराकरण कब तक किया जाता है।
पंचायत में जिम्मेदारों की कुर्सियां मिलीं खाली
वहीं, ग्राम पंचायत सूरजपुरा में मौके पर सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक की कुर्सियां खाली मिलने की बात भी सामने आई। ऐसे में पंचायत में अपने काम से पहुंचने वाले ग्रामीणों को संबंधित जिम्मेदारों से मिलने और अपनी समस्याएं रखने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, संबंधित कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के मौके पर मौजूद नहीं होने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि वे उस समय कहां थे और क्या किसी अन्य शासकीय कार्य में व्यस्त थे।
अब जिम्मेदारों से जवाब की उम्मीद
ग्राम पंचायत सूरजपुरा के इस मामले में अब यह देखना होगा कि गोधनदास पनरिया को आवास का लाभ कब तक मिल पाता है और उनकी समस्या के निराकरण के लिए संबंधित विभाग द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं। साथ ही, पंचायत में सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक की अनुपस्थिति के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।
अब सवाल यह है कि जब ग्रामीण आवेदन और आवश्यक जानकारी देने के बाद भी आवास के लिए भटक रहे हैं, तो उनकी समस्या का समाधान आखिर कब होगा?

