बप्पा, अगली बार पुराना वाला भारत लेकर आना
आप आते हो तो घर-आंगन मुस्कुराता है,
हर चेहरा उम्मीदों से भर जाता है।
आप आशीर्वाद देते हो, नए सपने दिखाते हो,
कुछ दिन हमारे होकर… फिर चले जाते हो।
बप्पा, हर साल तुम आते हो,
हमारे दुख-सुख के साथी बन जाते हो।
हम अपनी हर चिंता तुम्हें सुनाते हैं,
और विदाई की घड़ी आते ही
न जाने क्यों आंखों में आंसू भर आते हैं।
पर बप्पा…
इस बार जब जाना, तो खाली हाथ मत जाना।
हमारे देश का भ्रष्टाचार साथ ले जाना,
बेईमानी और अन्याय का अंधेरा मिटा जाना।
गरीब की मजबूरी बिके नहीं,
सच्चाई किसी ताकत के आगे झुके नहीं—
ऐसा हिंदुस्तान बना जाना।
बप्पा, हमारे बच्चों की रक्षा करना,
हर क्रूरता और अत्याचार से उन्हें बचाना।
किसी बेटी की आंखों में डर न हो,
किसी मासूम के साथ अन्याय न हो।
बलात्कार जैसी हैवानियत का नाम मिट जाए,
हर बेटी निर्भय होकर घर लौट पाए।
धर्म के नाम पर जो दिल बंट रहे हैं,
उन दिलों को फिर से मिला जाना।
जाति और मजहब की दीवारों से ऊपर
इंसानियत का दीप जला जाना।
नफरत को अपने साथ ले जाना बप्पा,
और प्रेम यहीं छोड़ जाना।
अहंकार अपने साथ ले जाना,
और संस्कार यहीं छोड़ जाना।
लालच अपने साथ ले जाना,
और संतोष यहीं छोड़ जाना।
हमारे युवाओं को ऐसी राह दिखाना,
जहां नशा नहीं, संस्कार हों,
हाथों में गलत रास्ते नहीं,
मेहनत और रोजगार हों।
उनके सपनों को पंख देना,
माता-पिता के चेहरों पर गर्व देना।
और बप्पा…
अगली बार जब आना,
तो वो पुराना वाला भारत लेकर आना।
जहां रिश्तों में अपनापन था,
बड़ों के लिए सम्मान था।
बच्चों में संस्कार थे,
पड़ोसी भी परिवार था।
जहां बेटी पूरे सम्मान के साथ चलती थी,
जहां मां की ममता और पिता की सीख
सबसे बड़ी दौलत हुआ करती थी।
जहां त्योहार केवल हमारे-तुम्हारे नहीं,
हम सबके हुआ करते थे।
जहां अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद
दिलों में एक-दूसरे के लिए सम्मान हुआ करता था।
बप्पा, ऐसा भारत फिर से लेकर आना—
जहां कुर्सी से बड़ी सेवा हो,
पैसे से बड़ी ईमानदारी हो,
धर्म से पहले इंसानियत हो,
और हर पहचान से ऊपर हिंदुस्तान हो।
आज आपकी विदाई है…
आंखें नम हैं, लेकिन विश्वास अटूट है।
क्योंकि हम जानते हैं—
आप जा रहे हो, हमें छोड़कर नहीं जा रहे।
आप हमारे विश्वास में रहोगे,
हमारी प्रार्थनाओं में रहोगे,
हमारे घर में, हमारे मन में
और हमारी हर नई शुरुआत में रहोगे।
बस जाते-जाते
हमारी इतनी-सी प्रार्थना स्वीकार कर जाना—
हमारे बच्चों को सुरक्षित रखना,
हमारी बेटियों को निर्भय रखना,
हमारे युवाओं को सही राह देना,
हमारे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना,
और हमारे भारत को फिर से
प्रेम, संस्कार और भाईचारे का भारत बना देना।
फिर अगले बरस आना बप्पा…
मगर इस बार से भी बड़ी मुस्कान लेकर आना।
हमारे दुख अपने साथ ले जाना
और हमारी खुशियां हजार गुना बढ़ाकर जाना।
गणपति बप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया!
अगले बरस तू जल्दी आ!

— कवि गोपाल गावंडे
इंदौर, मध्यप्रदेश

