Category : Dharm

माधुर्य, साक्षी भाव तथा प्रेम की उत्पत्ति का केंद्र है विशुद्धि चक्र

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पाँचवाँ चक्र विशुद्धि चक्र के नाम से जाना जाता है। मनुष्य की गर्दन में इसकी रचना है, इसमें सोलह पंखुड़ियाँ होती है जो कान, नाक, गला जिव्हा तथा दाँतो आदि की देखभाल करती है। दूसरों से सम्पर्क स्थापित कर...

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अबोध आनंद को प्राप्त करना ही सहजयोग है

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अबोधिता या मासूमियत एक ऐसा भाव या अवस्था है जो व्यक्ति को देवतुल्य बना देती है। अबोधिता को यदि समझना है तो हमें उस बचपन की ओर देखना चाहिए जिसका परिचय दुनिया के मायावी संसार से नहीं हुआ है। सहजयोग में ...

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