Category : Dharm

सत्य को धारण करने के लिए शुद्ध इच्छा शक्ति व बल चाहिए

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प. पू. श्री माताजी प्रणित सहजयोग एक सत्ययोग है। सत्य के बारे में कहा जाता है कि 'सत्यमेवजयते' अर्थात् सत्य की ही विजय होती है । उपनिषद् में वर्णित है,  'नायमात्मा बलहीनेन लभ्यो '  न अयम आत्मा बलहिजेन ...

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अपूर्णता के भाव की समाप्ति ही ईश्वर का सामीप्य है

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ईश्वर प्रदत्त इस प्रकृति व मानव मात्र के जीवन को सुंदर बनाना ईश्वर का ही कार्य है, क्योंकि जिस चीज को ईश्वर ने ही निर्मित किया है उसमें बदलाव लाना हमारे हाथ में नहींं।   फिर यह कैसे और क्यों कहा जाता ...

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