Category : Dharm

प्रकृति की सहायता से सूक्ष्म व स्थूल शरीर  का संतुलन ही सहजयोग ध्यान है

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मनुष्य के शरीर की संरचना प्रकृति के पंच तत्वों से हुई है। प्रकृति की सहायता से मनुष्य अपने भीतर सन्तुलन स्थापित कर सकता है। हमारे अंदर के सात चक्र प्रकृति के भिन्न-भिन्न तत्वों से ही बने हैं और इन्हीं...

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भय, अहंकार और क्रोध का त्याग ही भक्ति का प्रारंभ है

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ज्ञान रुपी चक्षु कोई भी जन्म से ही लेकर नहीं पैदा होता। और न ही इसे कोई स्वयं अपने बलबूते पर धारण कर सकता है। इसे धारण करने के लिए किसी ज्ञानी का सानिध्य जरूरी है। यहां तक कि राम चंद्र जी जैसे अवतरित ...

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