Category : Dharm

सहजयोग ध्यान : साक्षी भाव और निर्विचारिता की सहज अवस्था

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सहजयोग ध्यान कोई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि चेतना की वह सहज अवस्था है जिसमें मनुष्य अपने आत्मस्वरूप में प्रतिष्ठित हो जाता है। यह किसी मानसिक प्रयास, एकाग्रता या विचारों को दबाने का अभ्यास नहीं, बल्कि आ...

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सहजयोग आज का महायोग : हृदय चक्र की जागृति से प्राप्त होती है निडरता, आत्मविश्वास एवं ओजस्विता

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भारतीय योग परंपरा में अनहद (हृदय) चक्र को प्रेम, करुणा, सुरक्षा और आत्मबल का केंद्र माना गया है। यह सूक्ष्म शरीर का चौथा चक्र है, जो उरोस्थि (स्टर्नम) के पीछे मेरुरज्जु में स्थित है तथा इसकी बारह पंखु...

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