Category : Dharm

अनहद (हृदय) चक्र : निस्वार्थ प्रेम, निर्भयता और आत्मविश्वास का केंद्र

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मानव के सूक्ष्म शरीर में स्थित सात प्रमुख चक्रों में चौथा चक्र अनहद या हृदय चक्र कहलाता है। यह उरोस्थि (स्टर्नम) के पीछे, मेरूरज्जु के स्तर पर स्थित है तथा इसकी बारह पंखुड़ियाँ मानी गई हैं। सहजयोग के ...

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मधुर वाणी: सफलता, संबंध और आध्यात्मिक उन्नति की आधारशिला

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वेदों का संदेश "सत्यम् वदं, प्रियम् वदं" केवल एक नैतिक शिक्षा नहीं, बल्कि जीवन को सुंदर और सार्थक बनाने की एक साधना है। सत्य बोलना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है उसे प्रेम, विनम्रता और मधुरता के स...

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