Category : Dharm

सभी प्रकार की भक्ति में श्रेष्ठ है गुरु के अमृतवचनों का अनुसरण

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"मूल ध्यान गुरु रूप है, मूल पूजा गुरु पाँव।मूल नाम गुरु वचन है, मूल सत्य सतभाव॥"— संत कबीरभारतीय आध्यात्मिक परंपरा में गुरु को केवल ज्ञानदाता नहीं, बल्कि आत्मज्ञान का मार्गदर्शक माना गया है। संतों और ...

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पछतावा

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उम्र गुजर गई, तब समझ में आया,ज़िंदगी तो जीनी थी,पर हम उसे टालते ही रह गए। वक़्त की रफ़्तार को हल्का समझा,और एक दिन वही वक़्तहमसे बहुत आगे निकल गया। दौलत कमाने में इतने व्यस्त रहे,कि रिश्तों की दौलत खो...

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