शासन के आदेशों को ठेंगा: खकनार के मांजरोदकला में नहीं हुई ग्राम सभा, सचिव और नोडल अधिकारी गायब; ग्रामीणों ने किया घंटों इंतज़ार

  • Share on :

महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स 
बुरहानपुर - मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत तय प्रावधानों के अनुसार, आज 5 जून 2026 को "विश्व पर्यावरण दिवस" के विशेष अवसर पर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना अनिवार्य था। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के प्रमुख बिंदुओं पर जनता के बीच चर्चा करना था। लेकिन बुरहानपुर जिले के खकनार ब्लॉक के ग्राम मांजरोदकला में शासन के इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।

​यहाँ न तो पंचायत के जिम्मेदार सचिव पहुंचे और न ही शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी। घंटों इंतजार करने के बाद ग्रामीणों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ा।

​पंचायत में पसरा सन्नाटा, सुनने वाला कोई नहीं

​मांजरोदकला के ग्रामीण आज सुबह से ही अपनी समस्याओं और गांव के विकास पर चर्चा करने के लिए पंचायत भवन पहुंचे थे। लेकिन वहां जिम्मेदार कुर्सियां खाली पड़ी थीं। उपसरपंच प्रतिनिधि ने इस पर तीखा आक्रोश जताते हुए कहा:

​"ग्राम पंचायत में कौन से कार्य हो रहे हैं, कितना बजट आ रहा है, इसकी कोई भी जानकारी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को नहीं दी जा रही है। सचिव और अधिकारी अपनी मनमानी पर उतारू हैं और शासन के आदेशों को मानने को तैयार नहीं हैं।"


​सालभर से नहीं मिली डेम निर्माण की मजदूरी, दाने-दाने को मोहताज ग्रामीण

​ग्राम सभा के निरस्त होने से उन गरीब ग्रामीणों को सबसे बड़ा झटका लगा है, जो पिछले एक साल से अपनी मेहनत की कमाई के लिए भटक रहे हैं। मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्होंने गांव में हुए डेम (बांध) निर्माण कार्य में कड़ी मजदूरी की थी। आज पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।

​ग्रामीणों ने रुआंसे और आक्रोशित स्वर में कहा, "हम सालभर से परेशान हैं, हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हम आज इसी आस में ग्राम सभा में आए थे कि साहब लोग आएंगे तो हमारी मजदूरी कब मिलेगी, यह सवाल पूछेंगे। लेकिन यहाँ तो सुनने वाला कोई जिम्मेदार ही मौजूद नहीं है।"

​खकनार ब्लॉक में अव्यवस्थाओं का बोलबाला

​यह बदहाली सिर्फ मांजरोदकला तक सीमित नहीं है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, खकनार ब्लॉक की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह की भारी अव्यवस्थाएं पैर पसारे हुए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की फील्ड से नदारद रहने की आदत के चलते ग्रामीण लगातार परेशान हो रहे हैं और शासन की कल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सिमट कर रह गई हैं।
​बड़ा सवाल: विश्व पर्यावरण दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और प्रादेशिक आयोजन पर शासकीय कर्तव्य से नदारद रहने वाले इन सचिवों और नोडल अधिकारियों पर जिला प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करेगा? और सबसे बड़ा सवाल यह कि इन गरीब मजदूरों को उनकी सालभर पुरानी रुकी हुई मजदूरी कब नसीब होगी?

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper